विदेशमंत्री सुषमा स्वराज द्वारा मंगलवार को संसद में बताया गया कि इराक के मोसुल में लापता 39 भारतीय नागरिक मारे गए. उन्होंने संसद में कहा कि पूरे सबूत मिलने के बाद मैं कह सकती हूं कि सभी 39 लोगों की मौत हो चुकी है.

बता दें कि देश के विभिन्न हिस्सों से 39 भारतीय नागरिकों का आतंकी संगठन आईएसआईएस ने 2014 में अपहरण कर लिया था. ये सभी लोग इराक के निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय श्रमिक थे. ऐसे में अब मारे गए लोगो के परिजनों ने सवाल उठाया कि पिछले चार सालों से विदेश मंत्री हमसे कह रही थी कि वह जिंदा है और अब सरकार कहती है कि उनकी मौत हो गई है.

इराक में मारे गए 39 लोगों के परिजनों ने लगाए विदेश मंत्री पर गंभीर आरोप, की DNA रिपोर्ट देखने की मांग

परिजनों का कहना है कि इस बारे में हमें सरकार कि तरफ से कोई अधिकारिक सूचना नहीं दी गई है. हमने तो कल ही विदेश मंत्री का संसद में उनका बयान सुना है. परिजनो ने ये भी कहा कि मरने वाले हमारे परिवार के सदस्य थे. लेकिन मंत्री जी ने एक बार भी हमसे बात करना जरूरी नहीं समझा वो केवल मीडिया से ही बात करने में व्यस्त है

मृतकों के परिजनो का आरोप है कि जब सुषमा जी को उन लोगो की मौत खबर मिल गई थी तो उन्हें चाहिए था कि खबर मिलते ही हम लोगों से संपर्क करना चाहिए था. वहीं एक ओर मृतक के पत्नी ने बताया कि उनके पति सात साल पहले इराक गए थे. ओर उनसे हमारी 2015 तक बात होती रही है. सरकार के लोग दो-तीन महीने पहले ही हमारा डीएनए सैंपल लेकर गए.

harjit masih questioned the union governments motive for subjecting him to interrogation and detention after his return

इसी के साथ आईएसआईएस के आतंकियों से बचकर आए हरजीत मसीह ने भी सरकार पर मारे गए भारतीयों के परिवार के लोगों को बरगलाने का आरोप लगाया. हरजीत का दावा है कि उन्होंने 11 जून 2014 को ही सरकार को भारतीयों के अगवा करने और मारे जाने की बात बताई थी.

मसीह का दावा है कि आईएस के चंगुल से बचकर निकलने वालों में वह अकेले शख्स हैं और उनके सामने ही 39 और मजदूरों की हत्या कर दी गई थी. हालांकि सुषमा स्‍वराज ने हरजीत मसीह के दावे को खारिज कर दिया.

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