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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के डिडीहाट से एक आईएसआई एजेंट की गिरफ्तारी के मामले में एक के बाद एक खुलासे होते जा रहे है. आईएसआई एजेंट रमेश सिंह ने रुपयों की लालच में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को देश की कई गोपनीय जानकरी दी.

पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में दो साल की तैनाती के दौरान आईएसआई ने रमेश की मदद से ब्रिगेडियर के इस्लामाबाद स्थित घर के कंप्यूटर और लैपटॉप को स्पाईवेयर से हैक कर कई जानकारी हासिल की थी.

गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार ने बताया कि रमेश 2015 में सेना के एक ब्रिगेडियर के साथ बतौर रसोईया पाकिस्तान गया था. वहां आईएसआई ने उसे पैसों का लालच देकर उससे फाइल और अन्य सूचनाएं लेनी शुरू कर दीं.

बाद में आईएसआई की पहुंच ब्रिगेडियर की गैर मौजूदगी में उनके रूम तक हो गई. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने इस दौरान ब्रिगेडियर के घर में कई तरह के खुफिया डिवाइस लगा दी और महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने लगे. इन सबके बदले रमेश को डॉलर में भुगतान किया जाता था.

आनंद कुमार ने बताया कि आखिरी बार जब रमेश पाकिस्तान से वापस आया तो उसे 1300 डॉलर दिए गए थे. सितंबर 2017 में वापस आए रमेश को आईएसआई ने एक मोबाइल और पाकिस्तान का सिम कार्ड दिया था, जिससे वह बराबर संपर्क में था. शुरुआती पूछताछ में रमेश ने बताया है कि उसने यूपी में भी कई स्थानों पर सेना की गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाई है.

एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया कि बरामद किए गए मोबाइल में भी स्पाईवेयर होने का शक है. इसलिए मोबाइल का फोरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि मोबाइल का डाटा रिकवर कराने से भी कई अहम जानकारी मिल सकती हैं.

असीम अरुण ने यह भी बताया कि रमेश पर 8 से 9 लाख रुपये का कर्ज था. इस कर्ज को उतारने के लिए भी उसने दुश्मन देश की खुफिया एजेंसी से समझौता कर लिया. उन्होंने बताया कि अब तक कुल कितनी रकम इसे दी गई, क्या क्या सूचनाएं उसने लीक की, यूपी में किन स्थानों पर जासूसी की जिम्मेदारी दी गई थी और जो धन मिला उसे कहां खर्च किया, यह सारी जानकारी रिमांड पर लेने के बाद इकट्ठा की जाएगी.

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