प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुस्लिम समुदाय के छात्रों के एक हाथ में कुरान और दुसरे हाथ में लेपटॉप देने के वादे के बीच बड़ा खुलासा हुआ है. जिसने मोदी सरकार के दावों की पोल खोल के रख दी है.

दरअसल, जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है. अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय अपना पूरा बजट अल्पसंख्यक समुदायों के विकास पर खर्च ही नहीं कर रहा है. हालांकि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस बजट में करीब 700 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है.

मंत्रालय से जुड़ी एक संसदीय स्थाई समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया,  अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आवंटित 4,195 करोड़ के सालाना बजट का करीब 60 फीसदी हिस्सा ही खर्च किया है और करीब 40 फीसदी हिस्सा अभी भी शेष पड़ा है जबकि वित्त वर्ष समाप्त होने में अब सिर्फ 15 दिन बचे हैं.

बता दें कि 2013-14 के मनमोहन सिंह सरकार में इस मंत्रालय के लिए बजट आवंटन 3511 करोड़ था जिसे मोदी सरकार ने अगले ही साल 2014-15 में बढ़ाकर 3711 करोड़ कर दिया था।. इसके बाद मोदी सरकार ने 2015-16 में 3712.78 करोड़, 2016-17 में 3800 करोड़ और 2017-18 में 4195 करोड़ रुपये कर दिया था.

अल्पसंख्यकों को मिलने वाले इस बजट की राशि मुस्लिम, सिख. ईसाई, पारसी, जैन और बौद्ध समुदाय के लोगों के लोगों पर खर्च की जाती है.

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