आधार की अनिवार्यता के मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान केंद्र की और से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ने वाले सर्कुलर पर केंद्र को फजीहत का सामना करना पड़ा.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने  सवाल किया कि  कोर्ट ने आधार को सिम से जोड़ने का कोई आदेश जारी नहीं किया लेकिन सर्कुलर में कहा गया कि कोर्ट का आदेश है?

जिस पर UIDAI की ओर से कहा गया कि ये मार्च 2017 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश था. जस्टिस सीकरी और जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट ने ये आदेश जारी नहीं किया था बल्कि फैसले में AG की दलीलों को रिकार्ड किया गया था.

इस पर UIDAI की तरफ से राकेश द्विवेदी ने कहा कि दूरसंचार विभाग ने ई-केवाईसी के जरिए मोबाइल नंबरों के पुन: सत्यापन के बारे में कहा था और टेलीग्राफ अधिनियम के तहत सरकार को सेवा प्रदाताओं के लिए लाइसेंस की शर्तों का फैसला करने का अधिकार है. इस पर बेंच ने कहा, “आप सेवा लेने वालों पर शर्तें कैसे लगा सकते हैं?” पीठ ने कहा कि लाइसेंस समझौता सरकार और सेवा प्रदाताओं के बीच है.

ASG तुषार मेहता ने भी UIDAI की तरफ से दलील दी कि pan और आधार की लिंक करने का मकसद भी आयकर चोरी, कालाधन की आवाजाही या फिर आर्थिक गड़बड़ को रोकना था. आर्थिक सुधार और पारदर्शिता के लिए बैंक खाता खोलने में आधार की अनिवार्यता का प्रावधान किया गया था.


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