Monday, December 6, 2021

निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायपालिका के बिना कोई नागरिक सुरक्षित नहीं: जस्टिस चेलमेश्वर

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सुप्रीम कोर्ट के दूसरे नंबर के वरिष्ठ जज जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि “अगर निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायपालिका नहीं है, तो देश में कोई भी नागरिक सुरक्षित नहीं है.”

शनिवार को नागपुर में एक कार्यक्रम में चेलमेश्वर ने कहा, ‘मैं यहां किसी पर दोष मढ़ने नहीं आया लेकिन मुझे अगली पीढ़ियों की चिंता जरूर है. अगर मैं भावी पीढ़ियों को मर्यादा के साथ जीना देखना चाहता हूं, तो हमें न्यायपालिका को सुरक्षित और सशक्त बनाना होगा.’

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि न्यायपालिका पर कार्यपालिका की दखलअंदाजी से लगातार खतरा बढ़ता है. इसलिए बार काउंसिल को विजिलेंस की भूमिका में आना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘यह सिस्टम अगर सामाजिक समस्याओं के प्रति मजबूत, स्वतंत्र, सक्षम और जवाबदेह नहीं है, तो इस देश में कोई सुरक्षित नहीं है.

उन्होंने कहा, “न्यायिक जांच की व्यवस्था को खत्म करने से सभी तरह की सरकारों की शक्ति एकदम से बढ़ जाएगी. ऐसा होने पर हालात बेकाबू होंगे. क्योंकि, किसी के हाथ में भी शक्ति (राजनीतिक शक्ति) दे देने से भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति बढ़ने लगती है.

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि 12 जनवरी को उन्होंने जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ जो संवाददाता सम्मेलन किया था, वह रोष और सरोकार का नतीजा था क्योंकि शीर्ष न्यायालय के कामकाज के बारे में उनकी तरफ से उठाए गए मुद्दों पर सीजेआई के साथ उनकी चर्चा का वांछित नतीजा नहीं निकल पाया था.

लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’ पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘सीजेआई, मास्टर ऑफ रोस्टर हैं. बेशक, सीजेआई के पास यह ताकत है. सीजेआई के पास पीठें गठित करने का अधिकार है लेकिन संवैधानिक प्रणाली के तहत हर अधिकार के साथ कुछ खास जिम्मेदारियां भी हैं.’

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