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जम्मू के कठुआ जिले में आठ साल की बच्ची के साथ मंदिर में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के बाद मोदी सरकार द्वारा 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप करने वाले दोषियों को मौत की सजा देने के प्रावधान संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है.

इस अध्यादेश को निर्भया के पिता ने एक राजनीतिक चाल करार दिया. निर्भया के पिता ने अध्यादेश को ‘औचित्यहीन’ करार देते हुए आरोप लगाया कि 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर यह फैसला किया गया है.

उन्होंने कहा , ‘बलात्कार बलात्कार होता है चाहे नाबालिग से हो या व्यस्क से. अध्यादेश में 12 वर्ष से कम आयु की बच्ची से बलात्कार के लिए ही मृत्युदंड का प्रावधान क्यों है? सभी बलात्कारियों को आजीवन कारावास या मृत्युदंड दिया जाना चाहिए , चाहे पीड़िता की आयु जो भी हो.’

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इस नए अध्यादेश के जरिए 2012 में बने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेस एक्ट (पॉक्सो) और साक्ष्य कानून में संशोधन किया जाएगा. इसके अलावा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और आपराधिक दंड संहिता (सीआरपीसी) में भी बदलाव किए जाएंगे.

दक्षिणी दिल्ली के एक इलाके में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में निर्भया का बलात्कार किया था और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. निर्भया के पिता ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि नये प्रावधान के तहत किशोर आरोपियों से कैसे निबटा जाएगा.