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पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में उपजे विवाद पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने सख्त टिप्पणी की है.

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को जिन्ना से न तो कभी कोई लगाव रहा और न ही यहां के मुसलमानों ने उनसे मोहब्बत की. एएमयू प्रशासन को चाहिए था कि वह उनकी तस्वीर खुद हटा देता.

‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि जहां तक जिन्ना को लेकर हंगामे का सवाल है तो यह सियासी है. बंटवारे को किसी ने अच्छा नहीं माना. इसके जिम्मेदार जिन्ना के साथ कई लोग थे. मुल्क के मुसलमानों ने जिन्ना को कभी तवज्जो नहीं दी और न ही उनसे कोई लगाव रखा. बंटवारे के कारण देश के मुसलमानों को जुल्म-ज्यादती का शिकार होना पड़ता है.

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सरकार कानून बनाए 

फरंगी महली ने कहा कि सरकार एक कानून बनाए. अंग्रेजी हुकूमत में ज्यादती करने वालों की चाहें सरकारी इमारतों या प्राइवेट जगहों पर इनकी तस्वीरें हैं हटा दिया जाए. जिन्ना हाउस को खत्म किया जाए.

उन्होंने लड़कियों की तालीम पर ख़ासा जोर दिया. उन्होंने कहा, जो हैसियत वाले हैं वह कम से कम तीन बच्चों की तालीम की जिम्मेदारी के लिए गोद लें. तालीम के लिए लोगों को जागरूक करें.

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