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नई दिल्लीः राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख गैयूरुल हसन रिजवी ने अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का समर्थन करते हुए कहा कि संवैधानिक दायरे में रहते हुए जरूरत पड़ने पर आयोग सुप्रीम कोर्ट में भी राम मंदिर निर्माण के पक्ष में याचिका दाखिल कर सकता है।

उन्होने कहा कि अगले सप्ताह आयोग की होने वाली बैठक में सांप्रदायिक तनाव जैसी बन रही स्थिति में आयोग की भूमिका और उसके रुख के बारे में चर्चा की जाएगी। इस बैठक में आयोग की राय से सरकार और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को अवगत कराने के लिए एक प्रस्ताव भी पारित किया जा सकता है।

जागरण से बातचीत में हसन रिजवी ने कहा कि देश का अधिकांश मुस्लिम समुदाय अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मुसलमानों ने व्यक्तिगत रूप से और मुस्लिम संगठनों से ओर आयोग को पत्र लिखकर अयोध्या में राम मंदिर बनाकर इस विवाद का सदा के लिए अंत करने का आग्रह किया है।

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उन्होने बताया, इनमें 99 फीसद का मानना है कि अयोध्या में अब दोबारा बाबरी मस्जिद बनना और वहां नवाज पढ़ा जाना कभी संभव नहीं हो पाएगा। ऐसे में वहां राम मंदिर निर्माण कर हमेशा के लिए विवाद को खत्म करना सही होगा। आयोग के अध्यक्ष के रूप में रिजवी ने अल्पसंख्यक समुदाय से सम्मानजनक समझौता कर जल्द राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने की भी अपील की है।

उनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई हो रही है। ऐसे में यदि मुस्लिम समुदाय को मालिकाना मिल जाता है, तब भी 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाकर वहां न तो मस्जिद बनाना संभव होगा और न ही नवाज पढ़ना। ऐसे में अदालत के बाहर सम्मानजनक समझौता कर विवाद को सदा के खत्म करना ज्यादा सही होगा।

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