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राजस्थान के अजमेर में सुलतान-ए-हिंद हजरत ख्वाजा गरीब नवाज (रह.) के 806वें उर्स का आगाज हो चूका है. ऐसे में जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी भी सुलतान-ए-हिंद के दरबार में हाजिर हुए. इस दौरान उन्होंने जायरीनों के लिए मेडिकल कैंप का भी उद्घाटन भी किया.

सुलतान-ए-हिंद के दरबार में हाजिरी से फारिग हुए मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैहि इस देश की महान साझा विरासत का हिस्सा हैं. हजरत गरीब नवाज अपने अच्छे किरदार से लाखों दिलों को मोहित किया और उन्होंने हमेशा एकता और भाई चारा की शिक्षा दी और अपने संदेश से सारी मानवता के बीच समानता और शांति को स्थापित किया. उन्होंने अपने व्यवहारिक जीवन से यह साबित किया कि तसव्वुफ न मात्र ज्ञान है और न कोई अलग पद्धति है, बल्कि यह खुदा के प्रति प्रेम और बिना किसी भेद-भाव उसके सारे बन्दों की सेवा का नाम है. हजरत गरीब नवाज कहते थे कि मूल फकीरी यह है कि नदी जैसी उदारता व सख़ावत, सूरज की तरह सब से स्नेह और पृथ्वी जैसी विनम्रता हो क्योंकि ये तीनों चीज़ें कोई भेदभाव किए बिना सबको अपना सहारा देती हैं.

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मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद हज़रत गरीब नवाज की इसी विचारधारा पर क़ायम है और उसने अपने एक सौ साल के काल में समाज सेवा के रास्ते इस्लाम के अमन व भाई चारे के इसी संदेश को आम करने की कोशिश की है. मौलाना मदनी ने इस बात पर जोर दिया कि सूफीवाद को मात्र किसी रस्म तक सीमित न किया जाए बल्कि उसके आध्यात्मिक संदेश को जन जन तक पहुंचाया जाए क्योंकि आज के समय में नफरत और सांप्रदायिकता के उन्मूलन में इसकी बड़ा भूमिका होगी.

मौलाना मदनी ने कहा कि उन्हें इस धरती से बहुत प्यार मिला है, यह जगह है जहां से दिलों को जोड़ने का पैग़ाम जाता है. उन्होंने कहा के यहाँ से हम मुस्लिम समाज की सभी वर्गों को जोड़ने का पैग़ाम देना चाहते हैं. हमने पिछले वर्ष चिकित्सा शिविर शुरू किया था, और ये हर साल जारी रहेगा.

वहीँ हाजी सैयद वाहिद हुसैन चिश्ती अंगरा, सचिव अंजुमन खुद्दाम सैयद जादगान दरगाह अजमेर शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि जमीयत के पूर्व महासचिव मौलाना हिफ़़जुर्रहमान सियोहारवी ने विभाजन के बाद के अशांत व उग्र माहौल में अजमेर शरीफ में उर्स व अन्य दैनिक प्रक्रियाओं की दौबारा शुरू कराया था. उन्होंने कहा जमीयत से सम्बंधित लोगों की ख्वाजा अजमेरी रहिमुल्लाह के प्रति आस्था व श्रद्धा किसी से कम नहीं है.

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