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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर जमकर हंगामा किया जा रहा है. यहाँ तक कि कुछ लोग विश्वविद्यालय को मिनी पाकिस्तान बता चुके है.

लेकिन देश में जिन्ना की तस्वीर ही कोई इकलोती विरासत नहीं है. दिल्ली के अब्दुल कलाम रोड (पूर्व नाम औरंगजेब रोड) पर स्थित जिन्ना हाउस आज भी जिन्ना के नाम से ही जाना जाता है. जो अब नीदरलैंड के राजदूत का निवास है.

इसी तरह आंध्र प्रदेश के गुंटूर में 60 से कहीं अधिक सालों महात्मा गांधी रोड पर जिन्ना मीनार स्थित है. जिसे जिन्ना के सम्मान में बनाया गया था. आजादी से पहले 1939 में मुहम्मद अली जिन्ना कुछ दिनों के लिए गुंटूर आए थे. यहां उन्होंने बड़ी जनसभा को संबोधित किया था. बस उसी की याद में यहां मीनार बनवा दी गई.

इस मीनार को शांति और सदभाव का प्रतीक माना जाता है.  बंटवारे के दौरान जब पूरे देश में हिंसा हुई गुंटूर में शांति बनी रही. अब ये मीनार यहां की लैंडमार्क इमारत भी है, जो यहां आता है, इस मीनार को देखने जरूर जाता है. ये छह स्तंभों पर खड़ी है. इसका ऊपरी हिस्सा गुंबदनुमा है. ये विशुद्ध तौर पर 20सदी के शुरू का मुस्लिम स्थापत्य है.

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जिन्ना हाउस

एक कहानी ये भी है कि इस मीनार को नगर पालिका के तत्कालीन चेयरमैन नदीम्पल्ली नरसिंह राव और तेलाकुला जलैया ने बनवाया. इसे उन्होंने जिन्ना का नाम दिया. इसके अलावा एक किस्सा और भी है. कहा जाता है कि जुदालियाकत अली खान आजादी से पहले मुस्लिम लीग के बड़े नेता थे और जिन्ना के प्रतिनिधि भी.

वो जब आजादी से पहले गुंटूर आए तो उनका जोरशोर से स्वागत किया गया. पूर्व राज्यसभा सदस्य और तेलगू देशम पार्टी के उपाध्यक्ष एसएम बाशा के ग्रेंडफादर लालजन बाशा ने जुदालियाकत के स्वागत में जिन्ना मीनार ही बनवा डाली.


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