कठुआ रेप केस की पीड़िता आठ वर्षीय बच्ची की पहचान उजागर करने वाले मीडिया घरानों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने ये जुर्माना मीडिया घरानों ने बुधवार को माफ़ी मांगे जाने के बाद लगाया है.

मीडिया घरानों की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि पीड़िता की पहचान जाहिर करने की गलती कानून की जानकारी नहीं होने और इस गलतफहमी के कारण हुई कि चूंकि पीड़िता की मौत हो चुकी है ऐसे में उसका नाम लिया जा सकता है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस भेज कर कहा कि जिस भी मीडिया हाउस ने कठुआ गैंगरेप पीड़िता की पहचान उजागर की है उनको 10 लाख रुपये कोर्ट को देने होंगे। ये राशि कोर्ट जम्मू-कश्मीर के पीड़ित मुआवजा फंड में भेज देगी.

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साथ ही हाईकोर्ट ने ये भी कहा है कि जो भी इस मामले में आरोपी पाया जाएगा उसको 6 महीने की जेल की सजा होगी. इस मामले की अगली सुनवाई अब 25 अप्रैल को की जाएगी.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने  निर्देश दिया कि यौन अपराधों के पीड़ितों की निजता और पीड़ितों की पहचान जाहिर करने के दंड से संबंधित कानून के बारे में व्यापक और निरंतर प्रचार किया जाए.

बता दें कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून (पोक्सो) की धारा 23 मीडिया के लिए यौन अपराधों के पीड़ित बच्चों से संबंधित मामलों की रिपोर्ट को लेकर नियम कायदों से संबंधित है. भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 228 ए ऐसे अपराधों में पीड़ितों की पहचान जाहिर करने से संबंधित है. आईपीसी के तहत ऐसे मामलों में दो वर्ष कारावास और जुर्माने का प्रावधान है.

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