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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में मंदिर में 8 साल की असीफा के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में पीड़ित पिता का कहना है कि उनकी बच्ची को हिन्दू-मुसलमान क्या होता है. ये भी पता नहीं था. अगर बदला ही लेना था तो किसी और को उठा लेते.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पिता ने कहा कि उनकी बच्ची को अपने हाथ और पांव में पता नहीं था कि मेरा दायां हाथ कौन सा है और बायां हाथ कौन सा है. कभी उसने ये नहीं समझा कि हिंदू क्या होता है और मुसलमान क्या होता है.”

उन्होंने बताया कि उन्होंने असीफा को उस वक्त गौड़ लिया था. जब उनके दो और बच्चे जीवित नहीं रह सके थे. गोद लिए जाने के वक्त बच्ची एक वर्ष की थी. जनवरी में वह अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए सांबा गई थी, जहां उसने नए कपड़े सिलवाए थे, तब वह आखिरी बार घर से बाहर निकली थी. लेकिन शादी के चार दिन पहले 10 जनवरी को उसे अगवा कर लिया गया और जो कपड़े वह पहने थी, उसकी लाश के पास से बरामद किए गए थे.

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पिता ने आगे कहा- ”हमने नहीं सोचा था कि हम अपनी बच्ची को डॉक्टर बनाएंगे, टीचर बनाएंगे. हमने इतनी बड़ी सोच रखी नहीं थी. हमने तो ये सोचा था कि पढ़ जाएगी तो अपने को देख लेगी, अपना वक्त गुजार लेगी, रहने का तरीका आ जाएगा, खूबसूरत थी, किसी अच्छे घर में चली जाएगी.”  उन्होंने आगे कहा- ”हमारी बच्चियां इलाके के स्कूलों में जाती थीं और हम अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ भाई-बहन की तरह रहते थे. हम एक-दूसरों के शादी समारोहों में पहुंचते थे.”

पिता ने बताया कि आरोपी ने उनके खिलाफ लोगों को भड़काया. वे हम पर आरोप लगाते थे कि ”हम गायों की तस्करी कर उन्हें जम्मू-कश्मीर में बेचते थे, हम नशे का सामान बेचते थे और हमारे जानवरों से उनकी फसलों को नुकसान हो रहा था… इसलिए हमारे बसने से हिंदुओं को नुकसान होगा, हालांकि हमारे दिमाग में ऐसी कोई भी बात नहीं थीं.” पिता ने बताया कि ”हमारे जानवरों के द्वारा फसलों के नुकसान को लेकर पुलिस अधिकारी सांझी राम गुस्से में हैं, हमने सोचा कि नुकसान होगा, थप्पड़ मारेंगे, एफआईआर लगा देंगे, या फिर जुर्माना भरना पड़ेगा. हमने नहीं सोचा था कि इतनी घिनौनी हरकत करेंगे.

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