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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की असीफा के साथ मंदिर में हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या को लेकर देश भर में गुस्सा है. देश का हर नागरिक चाहता है कि असीफा के गुनाहगारों को मौत मिले. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो उनका धर्म देखकर उन्हें बचाना चाहते है.

ऐसे में अब उन हैवानों के बारे में जानना जरुरी है. जो असीफा न केवल असीफा के बल्कि इस समाज और कानून के भी गुनाहगार है. इन हैवानों में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी और विशेष पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं.

चार्जशीट म सबसे पहला नाम है एक 19 साल के युवक का. जिसने असीफा का जंगल से अपहरण किया. उसे नशीली दवाएं खिलाई और फिर उसके साथ रेप किया. उसने पुलिस के सामने अपना गुनाह किया है. साथ ही बच्ची के शरीर पर मिले बाल से उसका डीएनए मैच हुआ है.

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दूसरा आरोपी है 60 साल का संजी राम. जो मंदिर का पुजारी भी है और रिटायर्ड राजस्व अधिकारी है. संजीराम ही इस पुरे मामले का मास्टर माइंड है. इसने मुस्लिमों से असीफा के जरिये बदला लेने के लिए अपने नाबालिग भतीजे और अन्य छह लोगों को लगातार उकसाया.

तीसरा आरोपी स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया. जो इस पुरे मामले की जाँच कर रहा था. बच्ची को मारने से पहले बलात्कार किया. कॉल डेटा रिकॉर्ड के हवाले से सामने आया कि खजुरिया उस मंदिर में मौजूद था. जहाँ 4 दिन तक असीफा को रख उसे बलात्कार किया गया था.

चौथा आरोपी है स्पेशल पुलिस ऑफिसर सुरिंदर कुमार. जिसकों चश्मदीदों ने उसे घटना वाली जगह देखा था. कॉल डेटा रिकॉर्ड में भी उनकी मौजूदगी सामने आई. पांचवा आरोपी है परवेश कुमार. जिसका नाम संजीराम के भतीजे ने लिया है. उस पर बच्ची के साथ लगातार रेप करने का इल्जाम है.

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छठा आरोपी है संजी राम का बेटा विशाल जंगोत्रा. जिसे फरेंसिक टेस्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था. विशाल, मेरठ में पढ़ता था और बलात्कार करने के लिए कठुआ आया था.

इसके अलावा दो अन्य पुलिकर्मियों को मामले की जानकारी होने और रिश्वत लेकर इसे रफा-दफा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. चार्जशीट के अनुसार एसआई आनंद दत्ता और हेड कॉन्स्टेबल तिलक राज ने सबूत नहीं जुटाए और बच्ची के कपड़े धोकर आरोपियों की मदद की.

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