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जम्मू-कश्मीर के कठुआ में एक नाबालिग बच्ची से मंदिर में गैंगरेप और उसकी हत्या के बाद सहमे पिता ने अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि उन्हें पहले जानवरों से डर लगता था. लेकिन अब इंसानों ने डर लगने लगा है.

असीफा के परिवार रसाना गांव छोड़कर चला गया है. परिवार अपने जानवरों और घोड़ों को लेकर राउंदोमेल चला गया है. असीफा के परिवार ने 17 दूसरे परिवारों के साथ चुपचाप पिछले गुरुवार को रसाना गांव छोड़ दिया था.

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आसिफा के पिता ने कहा- वहां दबाव असहनीय था. हमें लगातार धमकियां मिल रही थीं. हमें कहा जा रहा था कि पशु और घरों को जला देंगे. हम कैसे लड़ सकते हैं? अगर हमारे पशुओं को मार दिया जाएगा तो हमारे पास क्या बचेगा? हम बकरवाल हैं. यहीं हमारी रोजी-रोटी है. अगर वो मर जाएंगे तो हम भी मर जाएंगे. हम पहले ही अपना एक बच्चा खो चुके हैं. आसिफा का परिवार अब कभी कठुआ वापस नहीं जाएगा. दूसरे परिवार भी लौटने को लेकर अनिश्चित हैं.

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बच्ची के पिता ने आगे कहा- हम आखिर किसलिए वहां वापस जाएं? मेरे पास अब केवल एक उम्मीद है अगर हमारे देश में इंसानियत बची है तो इस मामले को उन्हीं नजरों से देखा जाना चाहिए. केवल मैंने अपनी बेटी नहीं खोई है बल्कि हिंदुस्तान की बेटी भी थी वो. तिरंगा रैली और इस मामले पर हो रही राजनीति को लेकर अपनी बात ठीक से न कह पाने वाले पिता ने कहा कि नेता इस मामले को अपने हिसाब से देख रहे हैं.

असीफा के परिवार अब किश्तवार जाएगा. जहां पहुंचने में उन्हें डेढ़ महीने का समय लगेगा. ये अब ईद-उल-जुहा पर पशुओं की बिक्री के लिए जंगलो से लोटेंगे.

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