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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जज लोया मामले में दोबारा जांच की अर्जी को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में कोई जांच नहीं होगी, केस में कोई आधार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला उन अर्जियों पर फैसला सुनाया है जिसमें सीबीआई की विशेष अदालत के जज बी एच लोया की कथित रहस्यमयी मौत की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है. उनके बयान पर संदेह करना संस्थान पर संदेह करना जैसा होगा. कोर्ट ने कहा कि मामले के जरिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस ए एम खानविलकर और डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने 16 मार्च को इन अर्जियों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

SC ने फैसले में कहा…

  • जस्टिस लोया की मौत प्राकृतिक थी.
  • सुप्रीम कोर्ट ने PIL के दुरुपयोग की आलोचना की.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, PIL का दुरुपयोग चिंता का विषय.
  • याचिकाकर्ता का उद्देश्य जजों को बदनाम करना है.
  • यह न्यायपालिका पर सीधा हमला है.
  • राजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं को लोकतंत्र के सदन में ही सुलझाना होगा.
  • PIL शरारतपूर्ण उद्देश्य से दाखिल की गई, यह आपराधिक अवमानना है.
  • हम उन न्यायिक अधिकारियों के बयानों पर संदेह नहीं कर सकते, जो जज लोया के साथ थे.
  • ये याचिका आपराधिक अवमानना के समान

बता दे कि सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे. उनकी मौत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में तब हुई थी, जब वे अपने सहयोगी की बेटी की शादी में जा रहे थे. जज लोया को कार्डिएक अरेस्ट (दिल का दौरा) आया था.

नवंबर 2017 में जज लोया की मौत के हालात पर उनकी बहन ने शक जाहिर किया. जज लोया कि बहन के मुताबिक, उनकी मौत नैचुरल नहीं थी. जिसके बाद कांग्रेसी नेता तहसीन पूनावाला , महाराष्ट्र के  पत्रकार बीएस लोने , बांबे लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य द्वारा विशेष जज बीएच लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिकाएं दाखिल की थी.

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