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भारत के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव अगले सप्ताह लाया जा सकता है. अगले सप्ताह सोमवार को इस मामले में नोटिस दिया जा सकता है.

दरअसल, सत्ताधारी पार्टी द्वारा चीफ जस्टिस को देशभक्त साबित करने की मुहिम से विपक्ष में नाराजगी है, जिन्होंने 1993 के बॉम्बे धमाकों में याकूब मेमन के मृत्युदंड को बरकरार रखा था और सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान को अनिवार्य कर दिया था.

नेशनल हेरल्ड के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है और चीफ जस्टिस ने सरकार के प्रति तटस्थता नहीं दिखाकर इसे खुद अपने ऊपर लिया है.  उन्होंने चीफ जस्टिस पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता करने का आरोप भी लगाया.

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इसी बीच खबर है कि कांग्रेस में गांधी परिवार के सबसे करीबी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस प्रस्ताव पर दस्तखत से इनकार कर दियाऔर पार्टी के अंदर दलील दी थी कि यह हमारी पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है.

ऐसी चर्चा है कि मनमोहन सिंह से जब पार्टी के एक सीनियर नेता और अधिवक्ता ने संपर्क किया तो मनमोहन सिंह ने व्यक्तिगत तौर पर उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया.

मनमोहन सिंह ने कहा कि यह कांग्रेस की संस्कृति नहीं रही है कि वह दूसरी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रहार करे या उसकी गरिमा को ठोस पहुंचाए. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि हमें इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि कहीं महाभियोग प्रस्ताव का दूसरे दल राजनीतिक फायदा न उठा लें.

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