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नई दिल्ली: दिल्ली महिला आयोग की चेयरमैन स्वाति मालीवाल ने 10वें दिन अपना अनशन तोड़ दिया है. उन्होंने केंद्र सरकार बच्चियों से बालत्कार के मामले में कानून को और सख्त करने के लिए अध्यादेश लाए जाने के बाद आज जूस पीकर अपना अनशन खत्म कर दिया है.

बता दे कि स्वाति बीते 13 अप्रैल से दिल्ली के समता स्थल पर अामरण अनशन कर रही थीं. स्वाति मालिवाल ने अपना अनिश्चितकाल अनशन खत्म करने के बाद कहा कि पहले मैं अकेले लड़ रही थी, लेकिन फिर देशभर के लोगों ने मुझे समर्थन दिया था. मुझे लगता है कि यह स्वतंत्र भारत में एक ऐतिहासिक जीत है. मैं इस जीत पर सभी को बधाई देती हूं.

उन्होंने कहा कि हर दिन बच्चियों के साथ जघन्य अपराध हो रहे हैं. इस पर कड़ा कानून बनवाने के लिए मैं हर जगह दौड़ी, सबसे गुहार लगाई और फिर थक-हारकर अनशन पर बैठ गई. स्वाति ने कहा, ”मुझसे नहीं देखा जाता कि 8 माह, 6 माह, 8 साल, 11 साल की बच्चियां कुचल दी जाती हैं.”

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शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों के लिए मृत्युदंड के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई. अध्यादेश के अनुसार, 16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार के मामले में, न्यूनतम सजा 10 साल से बढ़कर 20 साल हो गई.

वहीं 12 साल से कम उम्र की लड़की के बलात्कार के लिए न्यूनतम 20 साल का कारावास या आजीवन कारावास या फिर फांसी तक की सजा भी मुमकिन है. 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के रेप के दोषियों को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी. इन मामलों में जांच को 2 महीने में खत्म करना होगा. ट्रायल पूरा करने के लिए 2 महीने का समय निर्धारित किया गया है. इसके अलावा महिला के दुष्कर्म के मामले में न्यूनतम सजा 7 साल से 10 साल तक, उम्रकैद तक बढ़ाई जा सकती है.

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