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केंद्र की मोदी सरकार ने रोहिंग्यों के मुद्दें पर जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों को पत्र लिखकर उन्हें कैंपों तक सीमित रखने को कहा है. साथ ही केंद्र ने रोहिंग्या शरणार्थियों को आधार कार्ड या किसी भी तरह का पहचान पत्र देने से मना किया है.

इतना ही नहीं राज्यों से रोहिंग्या मुस्लिमों की निजी और बायोमेट्रिक जानकारी मांगी गई है. ताकि म्यांमार के साथ यह जानकारी साझा की जाए और अवैध शरणार्थी के तौर पर भारत में रह रहे रोहिंग्या को उनके मुल्क वापस भेजा जा सके.

टीओआई ने एक गृह मंत्रालय के अधिकारी के हवाले से लिखा है, ‘खुफिया जानकारी के मुताबिक देशभर में करीब 40 हजार रोहिंग्या मुस्लिम अवैध रूप से बसे हुए हैं. इनमें से 7,096 सिर्फ जम्मू, हैदराबाद में 3059, मेवात में 1200, जयपुर में 400 और दिल्ली के ओखला इलाके में इनकी तादाद 1061 के करीब है.’

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राज्य सरकारों को लिखे पत्र में कहा गया है कि रोहिंग्या और उनके साथ कैंपों में रहने वाले विदेशी फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर गैर कानून गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं. साथ ही पैन कार्ड, वोटर कार्ड जैसे दस्तावेजों का दुरुपयोग भी किया जा सकता है. इसके अलावा रोहिंग्या मुस्लिमों के कट्टरपंथियों के चंगुल में आने से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

मंत्रालय के मुताबिक पश्चिम बंगाल और असम में ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है जो रोहिंग्या को देश में दाखिल होते ही उन्हें पहचान से जुड़े फर्जी दस्तावेज मुहैया कराता है. यहां तक कि मुस्लिम संगठनों के कुछ ऐसे NGO भी हैं जो कैंपों में रहने वाले रोहिंग्या को सामान उपलब्ध कराते हैं.

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