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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की और से कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान फील्ड मार्शल करियप्पा को लेकर दिए गए बयान पर हंगामा मचा हुआ है. इसी बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईएके दस्तावेजों से बड़ा खुलासा हुआ है.

नवजीवन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2009 में अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने जो दस्तावेज सार्वजनिक किए थे, उनसे साबित होता है कि राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय सेना को भड़काने की साजिश रची थी. सार्वजनिक किया गया यह विस्फोटर दस्तावेज 12 जून 1950 का है. माना जाता है कि उस समय दिल्ली में सीआईए के जो भी एजेंट रहे होंगे, उन्होंने यह जानकारी अमेरिका को भेजी होगी.

दस्तावेज़ों से खुलासा होता है कि जनरल करियप्पा की हत्या की साजिश की गई थी. जनरल करियप्पा उस समय भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ थे और उनके पूर्वी पंजाब दौरे में उनकी हत्या करने की साजिश रची गई थी. इस दस्तावेज में कहा गया है कि चूंकि जनरल करियप्पा दक्षिण भारतीय थे, इसलिए आरएसएस ने उनकी हत्या के बहाने उत्तर-दक्षिण विभाजन करने की साजिश रची थी.

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इस दस्तावेज से यह नहीं पता चलता कि आखिर इस हत्या से आरएसएस हासिल क्या करना चाहता था या उसका मकसद क्या था? गौरतलब है कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद 4 फरवरी 1948 को आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. महात्मा गांधी का हत्यारा नाथूराम गोडसे आरएसएस का स्वंयसेवक था, लेकिन वह संघ का साथ छोड़कर हिंदू महासभा में शामिल हो गया था. हिंदू महासभा भी कट्टरपंथी संगठन था.

गौरतलब रहे कि पीएम मोदी ने कांग्रेस ने फील्ड मार्शल करियप्पा और जनरल थिमैया के अपमान का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘कर्नाटक बहादुरी का पर्याय है. लेकिन कांग्रेस ने फील्ड मार्शल करियप्पा और जनरल थिमैया के साथ कैसा व्यवहार किया, यह सबको पता है… 1948 में पाकिस्तान को हराने के बाद प्रधानमंत्री नेहरू और रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन ने जनरल थिमैया का अपमान किया था.’

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