बिट कॉइन जैसी सभी वर्चुअल करेंसी से लेन देन शरीअत में जायज़ नही

11:23 am Published by:-Hindi News

मथुरापुर स्थित इस्लामिक स्टडी सेण्टर जामिअतुर्रज़ा के अल्लामा हसन रज़ा कांफ्रेंस हॉल में शरई कौंसिल ऑफ़ इंडिया के 15 वां फ़िक्ही सेमीनार के तीसरे दिन “नीलामी और तहत ख़रीदी गई चीज़ों का हुक्म” पर उलमा की बहस हुई जिसमे उन्होंने उसका सफलतापूर्वक हल निकाला |

आपको बता दें कि उलमा ने नीलामी के ताल्लुक से बहस करते हुए बताया कि लोन पास होने से पहले एक फार्म पर लोन लेने वाले को दस्तखत करना होता है जिसमे वह बैंक को इजाज़त देता है कि लोन अदा ना करने की सूरत में बैंक अपना कर्ज़ इन सम्पतियों को बेच कर हासिल कर ले जिनके कागजात बैंक में जमा हैं इस तफसील की रौशनी में पहले इजाज़त देने की बुनियाद पर नीलामी के द्वारा ख़रीद व फ़रोख्त मुसलमान के लिये सही व मान्य होगी और जहाँ पहले से इजाज़त ना हो वहाँ पर मालिक की इजाज़त पर निर्भर है और जहा कोई इजाज़त देने वाला ना हो तो उस सूरत में नीलामी के ज़रिये मुस्लमान के लिये ख़रीद व फ़रोख्त जायज़ नहीं है |

ज्ञात हो कि इससे पहले उलमा ए किराम ने दो और अहम मसले हल किये थे उनमे से पहला डिजिटल करेंसी (वर्चुअल करेंसी) का था जैसे बिट कॉइन व वन कॉइन | वर्चुअल करेंसी के बारे में बताया था कि शरियत की नज़र में यह बर्की करेंसी (वर्चुअल करेंसी) माल नहीं है और यह फिजिकली भी नहीं पायी जाती और ना ही इसपर किसी हुकूमत या बैंक का कण्ट्रोल होता है इसलिए ऐसी बहुत सारी कंपनियां पैसे लेकर भाग जाती हैं या खुद को दिवालिया घोषित कर देती है जिससे लोगों का आर्थिक तौर पर भारी नुक्सान होता है | लिहाज़ा डिजिटल करेंसी (वर्चुअल करेंसी) में पैसा लगाना जायज़ नहीं है |

दूसरे मसले में उलमा ए किराम ने फ़रमाया था कि मस्जिदे हरम व मस्जिदे नब्वी अब मस्जिदे कबीर (बड़ी मस्जिद) हैं | बड़ी मस्जिद में नमाज़ी के सामने से उसके सजदा की जगह छोड़कर आगे से गुजरना जायज़ है लिहाज़ा अब अगर कोई मुस्लमान मस्जिदे हरम व मस्जिदे नब्वी शरीफ़ में नमाज़ी के सजदे की जगह के आगे से गुज़रता है तो उसके लिये जायज़ है और वह गुनाहगार नहीं होगा जबकि मस्जिदे सगीर (छोटी मस्जिद) में नमाज़ी के आगे से बगैर आड़ के गुज़ारना जायज़ नहीं और गुजरने वाला गुनाहगार होगा |

जमात रज़ा ए मुस्तफ़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जनाब सलमान हसन खान क़ादरी (सलमान मियां) ने बताया कि सेमीनार के आखरी सेशन में सारे फ़ैसलों को पढ़कर सुनाया गया और उनको लिखकर सारे उलमा ए किराम के दस्तखत लिये गये और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि शरई कौंसिल ऑफ़ इंडिया का 15 वां फ़िक्ही सेमीनार हुज़ूर ताजुश्शरिया अल्लामा मुफ़्ती मुहम्मद अखतर रज़ा खां क़ादरी अज़हरी की सरपरस्ती व शहर क़ाज़ी (बरेली शरीफ़) शहज़ादा ए ताजुश्शरिया मुफ़्ती मुहम्मद असजद रज़ा खां क़ादरी की सदारत में हुआ और आखिर में सारे फ़ैसलों पर हुज़ूर ताजुश्शरिया ने मोहर लगायी | शहर क़ाज़ी ने अपने ख़िताब में देश-विदेश से आये हुए उलमा ए किराम व मुफ्तियों की कोशिशों को सराहा व उनका शुक्रिया अदा किया और कहा कि शरई कौंसिल ऑफ़ इंडिया के सेमीनार इसलिए किये जाते है ताकि नये मसाईल के हुक्मे शरई से मुसलमानों को बाख़बर किया जा सके |

आखिर में अल्लामा ज़ियाउल मुस्तफ़ा क़ादरी ने सलातो व सलाम के बाद मुल्क व मिल्लत के लिए दुआ की | सेमीनार को कामयाब बनाने में जामिआतुर्रज़ा के शिक्षकों, छात्रों व स्टाफ का अहम् योगदान रहा |

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