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देश की जनता एक के बाद एक सामने आ रहे करोड़ो रूपये केबैंकिंग घोटालों से उबर नहीं पाई थी कि अब 1700 करोड़ का म्‍यूचुअल फंड का बड़ा घोटाला सामने आया है. जिसकी जांच अब बाजार नियामक संस्‍था सेबी (सिक्‍योरिटीज एंड एक्‍सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) कर रही है.

सेबी की आंतरिक जांच में एसेट मैनेजरों द्वारा की गई धांधली का खुलासा हुआ है.  एसेट मैनेजरों द्वारा शुल्‍क के तौर पर म्‍यूचुअल फंड में निवेश करने वालों से 1,600 से 1,700 करोड़ रुपये अतिरिक्‍त वसूले गए.

‘मिंट’ के अनुसार, सेबी की एडवायजरी कमेटी ने एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा वसूले गए शुल्‍क को वापस म्‍यूचुअल फंड स्‍कीम में ही लगाने की सिफारिश की थी. इस योजना के अमल में आने के बाद निवेशकों से गलत तरीके से ज्‍यादा शुल्‍क वसूला जाने लगा.

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म्‍यूचुअल फंड इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि सेबी द्वारा शर्तों के साथ 20 बेसिस प्‍वाइंट तक अतिरिक्‍त चार्ज वसूलने की सुविधा का एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने गलत फायदा उठाया. अब सेबी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस राशि को संबंधित निवेशकों को लौटाने की है. इसके लिए विशेष तौर-तरीकों का भी निर्धारण करना होगा.

एसेट मैनेजमेंट कंपनियों  ने समयपूर्व फंड से बाहर न निकलने वाले निवेशकों से भी एग्जिट लोड और अतिरिक्‍त शुल्‍क वसूला. साथ ही कंपनियों ने एग्जिट लोड के तौर पर शुल्‍क का भुगतान करने वालों से भी 20 बेसिस प्‍वाइंट के हिसाब से अतिरिक्‍त राशि वसूली.

बता दें कि म्‍यूचुअल फंड को बाजार में निवेश का सबसे सुरक्षित जरिया माना जाता है. निवेशक कर से बचने के लिए भी इसमें निवेश करते हैं.

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