Thursday, December 2, 2021

बेटे को खोकर दंगे रूकवाए, ऐसे इमाम का देश पर है एहसान: बरखा दत्त

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रामनवमी के मौके पर पश्चिम बंगाल के आसनसोल में हुई सांप्रदायिक हिंसा में अपने बेटे को खो चुके स्थानीय मस्जिद के इमाम मौलाना इम्दादुल रशीदी को लेकर जानी पत्रकार पद्मश्री बरखा दत्त ने बड़ा बयान दिया है.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, आसनसोल में जिस इमाम की मदद से दंगें रुके. जिनका खुद का बेटा मारा गया ऐसे पिता का देश को अहसानमंद होना चाहिए. जिसकी मीडिया बुरी तरह साम्प्रदायिकता और मुस्लिम-विरोधी डिबेट में फंसी है.

बता दें कि अपने बेटे सिबतुल्ला को दफनाने के बाद क्षेत्र के ईदगाह मैदान में हजारों लोग इकट्ठा हुए थे, जहां रशीदी ने भीड़ से शांति बनाए रखने की अपील की थी. उन्होंने लोगों से कहा, ‘मैं शांति चाहता हूं. मेरा बेटा तो जा चुका है. मैं नहीं चाहता की कोई परिवार अपने चहेते को खोए. मैं नहीं चाहता कि कोई और घर जले. मैं पहले ही कह चुका हूं कि बदला लिया गया तो आसनसोल छोड़ दूंगा. अगर मुझसे प्यार करते हैं तो एक उंगली भी नहीं उठाएंगे.’

हाल ही में रशीदी ने कहा कि अगर वह उस वक्त अपने दर्द को नहीं छुपाते तो पूरा शहर जलकर ख़ाक हो जाता.  रामनवमी के दिन की घटना को याद करते हुए रशीदी कहते है कि “रामनवमी के दिन मेरा बेटा सिबतुल्ला रशीदी नमाज पढ़ रहा था. बाहर लोगों के चिल्लाने की आवाज आ रही थी. जब उसने बाहर जाकर देखा तो भीड़ में वह कहीं खो गया. उसे खोजने के लिए बड़ा बेटा बाहर गया तो पुलिस ने पकड़ लिया. अगली सुबह एक फोन आया. बताया गया कि एक युवक का शव मिला. पहचान के लिए हॉस्पिटल पहुंचे तो वह मेरा बेटा था. उसे बेरहमी से मार दिया गया. नाखून उखाड़ दिए गए. उसे जला दिया गया.”

उन्होंने आगे बताया, “बेटे की ऐसी हालत देखकर मैं बुरी तरह रोने लगा, लेकिन याद रहा कि मैं सिर्फ एक बाप नहीं, बल्कि एक मस्जिद का इमाम भी हूं. मेरे आंसू लोगों के गुस्से का सैलाब बन सकते हैं. अगर मैं रोता तो पहले से जल रहा शहर पूरी तरह जलकर खाक हो जाता. मैंने अपने आंसू बाहर नहीं आने दिए, बल्कि लोगों से बदलने की भावना ना रखने और शांति की अपील की.”

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