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दिल्ली में मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गांगियासर निवासी कमांडो मुबारिक अली को शौर्य चक्र से सम्मानित किया. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहे.

सीने व हाथ में गोली लगने के बाद तीन आतंकवादियों को मारने वाले हवलदार कमांडो मुबारिक अली 30 जुलाई की सुबह सात बजे पुलवामा के दहाब क्षेत्र में सर्च अभियान पर सेना की टुकड़ी के साथ निकले थे.

इस दौरान नदी के पास कुछ आतंकी छीपे हुए थे. उन्होंने सेना पर अचानक से गोलीबारी शुरू कर दी. जिसके बाद कमांडो मुबारिक अली ने फायर किया. आतंकियों की गोली मुबारिक अली के दाहिने हाथ से निकल कर पार हो गई. एक गोली सीने पर लगी. हालांकि बुलेट प्रूफ जैकेट के कारण गोली सीने के पार नहीं हो सकी.

लेकिन घायल होने के बावजूद मुबारिक अली ने एक हाथ से फायर करते हुए तीन आतंकियों को मार गिराया. बाद में अस्पताल पहुंचाए जाने पर डॉक्टरों ने सीने से गोली निकाली. कुछ समय रेस्ट के बाद वे फिर पुलवामा में ड्यूटी पर चले गए. उनकी बहादुरी की कद्र करते हुए उन्हें शौर्य चक्र दिया गया.

बता दें कि मांडो मुबारिक अली 1997 में सेना की 16 ग्रेनेडियर में भर्ती हुए थे. 55 राष्ट्रीय राइफल्स में शामिल हवलदार मुबारिक अली ने करगिल युद्ध में भी भाग लिया. उनकी यूनिट करगिल के द्रास सेक्टर में तैनात थी. वे सियाचिन में भी रहे.


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