राजस्थान स्थित विश्व प्रसिद्ध हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (रह.) दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख, जैनुल अबदीन अली खान ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस विवाद का हल सिर्फ सर्व्वोच न्यायालय के पास ही है.

दरगाह दीवान ने भी धर्मों के नेताओं से सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करने और उसका सम्मान करने की अपील करते हुए कहा ‘धार्मिक कट्टरता किसी भी मसले का समाधान नहीं हैं.

उन्होंने कहा, इस मामले में अदालत के बाहर इसे सुलझाने का प्रयास भी असफल रहा हैं, इसलिए देश के हित में अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा,’धार्मिक कट्टरपंथी, चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम इसको समाधान तक नहीं पहुंचा सकेंगे.

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इसी के साथ दरगाह दीवान ने कुल की रस्म के दौरान अपने बेटे को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. सैय्यद जेनुअल आबेदीन ने पवित्र मजार पर होने वाली गुस्ल की रस्म के दौरान दीवान की गद्दी अपने बेटे सैय्यद नसुरुद्दीन को सौंप दी. जिसका खादिमों ने विरोध किया.

दीवान ने अपने बेटे से ये रस्म कराना चाहते थे. लेकिन खादिमों के विरोध के चलते उन्हें रात 2 बजे से सुबह 5 बजे तक बेटे नसीरुद्दीन के साथ जन्नती दरवाजे के बाहर बैठना पड़ा. बेटे को ग़ुस्ल की रस्म में शामिल नहीं होने से नाराज दीवान आबेदीन ने अपने बेटे के बिना आस्ताना शरीफ में प्रवेश नहीं करने की शर्त रख दी.

दीवान की इस हट पर भी खादिम नहीं माने और जन्नती दरवाजे को बंद कर दिया. जिसके बाद वे अपने बेटे के साथ जन्नती दरवाजे के बाहर धरने पर बैठ गए. तड़के सुबह करीब करीब 4.30 बजे जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने दीवान जैनुल आबेदीन को समझाया. जिसके बाद दीवान अपने बेटे के साथ चले गए और खादिमों ने जन्नती दरवाजा खोल दिया.

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