Saturday, November 27, 2021

आजाद हिंद फौज के सिपाही और क्रांतिकारी शेख रमजान कुरैशी का निधन

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आजाद हिंद फौज के वयोवृद्ध फौजी शेख रमजान कुरैशी का 3 अप्रैल की देर रात ओडिशा में निधन हो गया. वह बर्मा और जापान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पास लड़े और उन्हें कैद भी किया गया था. जिसके बाद वह सुभाष बोस के हस्तक्षेप की वजह से बाहर आ सके थे.

वह ओड़िशा के बरगढ़ जिले के मंडिकिल के पैकमल ब्लॉक में एक गांव में रहते थे और 90 वर्ष से अधिक आयु में उनका निधन हुआ. नेताजी की जयंती के अवसर पर उन्हें इस वर्ष 18 जनवरी, 2018 को भुवनेश्वर में सम्मानित भी किया गया था.

ध्यान रहे राजनीतिक नेता आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज की विरासत को सहेजने का दावा करते हैं. लेकिन शेख रमजान निरंतर बुरे हालात में रहे यहां तक कि उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों वाले पेंशन भी नहीं दी गई.

92 वर्ष की आयु में, शेख रमजान ने अपने दो बच्चे हलिमा (22) और अलीम मोहम्मद (21) के साथ छतरियों की मरम्मत का कार्य घर को चलाया.

शेख को नेताजी के नारों ने बहुत प्रेरित किया, “मुझे खून दो और मैं आपकी आजादी दे दूँगा”, इस नारे ने उन्हें फौज की तरफ आकर्षित किया. आजादी के बाद उन्होंने सेना में शामिल होने की कोशिश की लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

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