Friday, July 30, 2021

 

 

 

भगत सिंह से जेल में मिले थे नेहरू, पीएम मोदी ने बोला झूठ ?

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कर्नाटक के बीदर में एक रैली में भगत सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरु को लेकर दिया गया बयान गलत साबित हो रहा है. जिसमे उन्होंने कहा था कि देश की आजादी के लिए लड़ रहे महान शख्सियतों जैसे शहीद भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त जैसे नेताओं को अंग्रेजों ने जेल भेज दिया था, क्या कोई कांग्रेस नेता उनसे मिलने गया था? लेकिन कांग्रेस नेता वैसे भ्रष्ट नेताओं से मिलने जाते हैं, जिन्हें जेल हो चुका है.

लेकिन एतिहासिक तथ्य ये है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लाहौर जेल में 8 अगस्त, 1929 को भगत सिंह और उनके साथियों से मुलाकात की थी, जो प्रशासन के दुर्व्यवहार के खिलाफ जेल में भूख हड़ताल कर रहे थे.

बता दें कि 12 जून 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को विधानसभा में बम फेंकने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. जब वे इस मामले में लाहौर सेंट्रल जेल में बंद थे तो उन्होंने जेल में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर थी. 10 जुलाई 1929 को भगत सिंह, दत्त और दूसरे ‘कैदियों’ के खिलाफ लाहौर षड़यंत्र में सुनवाई होने लगी. इसके बाद दूसरे कैदी भी भूख हड़ताल में शामिल हो गये. 7 अक्टूबर 1930 को भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजी अदालत ने मौत की सजा सुनाई. इन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई.

लाहौर में 9 अगस्त 1929 (समाचार पत्र द ट्रिब्यून द्वारा 10 अगस्त 1929 को दी गई खबर के मुताबिक) “पंडित जवाहर लाल नेहरू एमएलसी डॉक्टर गोपीचंद के साथ लाहौर जेल गए और बोर्स्टल जेल में लाहौर षड्यंत्र केस में भूख हड़ताल कर रहे सत्याग्रहियों से मुलाकात की और उनका साक्षात्कार किया.”

इस बातचीत के बारे में नेहरू ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में लिखा है और ये बताया है कि वे भगत सिंह से किस तरह प्रभावित थे. नेहरू ने लिखा, ‘मैं उस समय लाहौर में था, जब भूख हड़ताल को एक महीने हो गए थे. मुझे जेल में बंद कैदियों से मुलाकात की परमिशन दी गई और मैंने इसका लाभ उठाया.’ उन्होंने लिखा, “मैंने पहली बार भगत सिंह, जतींद्र दास और अन्य लोगों को पहली बार देखा.”

“वे सब लोग बहुत कमजोर दिख रहे थे और बिस्तर पर थे, उनसे बहुत ज्यादा बात करना भी मुश्किल लग रहा था. भगत सिंह के पास एक आकर्षक बौद्धिक चेहरा था, जो उल्लेखनीय रूप से शांत था. उनमें कोई क्रोध नहीं दिख रहा था. उन्होंने बहुत ही सज्जनता से बात की, लेकिन मुझे लगा कि जो कोई भी एक महीने तक उपवास करता है आध्यात्मिक और सौम्य दिखता है.”

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