नई दिल्ली: 2002 में हुए गुजरात दंगों पर नानावटी आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट के मंत्रियों को क्लीनचिट दे दी है।इन दंगों में 2000 से अधिक लोग मारे गए थे जिनमें से अधिकतर मुसलमान थे।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार बुधवार को विधानसभा में पेश आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जो यह दिखाए कि यह हमले राज्य के किसी मंत्री द्वारा उकसाए या भड़काए गए थे।’ नौ वॉल्यूम में 1,500 से अधिक पन्नों में संकलित यह रिपोर्ट नवंबर 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सौंपे जाने के पांच साल बाद विधानसभा में पेश की गयी है।

इसमें कहा गया है कि कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस अप्रभावी रही क्योंकि उनके पास पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी नहीं थे या वे हथियारों से अच्छी तरह लैस नहीं थे। आयोग ने अहमदाबाद शहर में साम्प्रदायिक दंगों की कुछ घटनाओं पर कहा, ‘‘पुलिस ने दंगों को नियंत्रित करने में सामर्थ्य, तत्परता नहीं दिखाई जो आवश्यक था।”

नानावती आयोग ने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच या कार्रवाई करने की सिफारिश की है। आयोग ने गुजरात सरकार के खिलाफ पूर्व आईपीएस अधिकारियों आरबी श्रीकुमार, राहुल कुमार और संजीव भट्ट द्वारा दिए गए सबूतों और बयानों को ख़ारिज कर दिया।

बुधवार को गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा में विधानसभा में कहा कि इनके खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की जा चुकी है। बता दें कि साल 2002 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने दंगों की जांच के लिए आयोग गठित किया था।

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