नई दिल्ली | भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी इनफ़ोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने एच-1बी वीजा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है की हमें इस फैसले का फायदा उठाना चाहिए न की इसकी कमिया ढूंढनी चाहिए. नारायण मूर्ति ने विदेशो में लोकल हायरिंग पर जोर देते हुए कहा की भारतीय आईटी कंपनियों को विदेशो में वहां के नागरिको को नौकरी पर रखना चाहिए.

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एच-1बी वीजा पर सख्त रुख अपनाते हुए इसमें बदलाव करने का निर्णय लिया है. उनके फैसले के बाद अमेरिका स्थित भारतीय आईटी कंपनियों में काम करने वालो भारतीय सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. क्योकि एच-1बी वीजा मिलने वालो में सबसे ज्यादा तादात भारतीय आईटी प्रोफेशनल की होती है. करीब 80 फीसदी भारतीय एम्प्लोयी हर साल एच-1बी वीजा जारी किया जाता है.

डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नारायण मूर्ति ने कहा की आजकल मल्टी कल्चर होना बहुत मुश्किल है. इसलिए विदेशो में स्थित भारतीय आईटी कंपनियों को वहां के नागरिको को नौकरी देनी चाहिए. न केवल अमेरिका बल्कि कनाडा और ब्रिटेन में काम करने वाली कम्पनीयो को भी वहां के नागरिको को ही नौकरी पर रखना चाहिए. तभी हम मल्टीनेशनल बन सकते है.

मूर्ति ने एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए कहा की ऐसा तभी हो सकता है जब हम एच-1बी वीजा का इस्तेमला करना बंद करे. मूर्ति ने आगे कहा की दरअसल हम भारतीय हमेशा आसान रास्ता चुनते है. हमें वहां के कॉलेजों में जाकर हायरिंग करनी चाहिए. उनको ट्रेनिंग देकर अपने यहाँ नौकरी पर रखना चाहिए. इससे विदेशो में भारतीय कंपनियों की अहमियत बढ़ेगी. हमें आगे बढ़ने के लिए गैर भारतीयो के साथ काम करना सीखना होगा.

मालूम हो की एच-1 वीजा के जरिये अमेरिकी कंपनिया विदेशो से टेक्निकल एक्सपर्ट और प्रोफेशनल्स को नौकरी देती है. इसको नॉन इमिग्रेट वीजा भी कहा जाता है. 1989 में पास कानून के अनुसार ,अमेरिका में 60 हजार डॉलर वेतन पाने वाले एम्प्लोयी को यह वीजा जारी किया जाता था. अब ट्रम्प ने इस नियम को बदलकर 1.30 लाख डॉलर वेतन पाने वालो को यह वीजा जारी करने का आदेश दिया है.

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