पुलवामा अटैक के बाद जहां कई जगहों पर कश्मीरियों के ऊपर अटैक होने की खबर आ चुकी है, अब कराची बेकरी नाम की दुकान को भी विरोध झेलना पड़ा है।

ध्यान रहे साल 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त भारत आए एक सिंधी खानचंद रामनामी ने साल 1952 में इस बेकरी की शुरुआत की थी। चूंकि खानचंद रामनामी पाकिस्तान के कराची शहर से पलायन करके हैदराबाद पहुंचे थे। इसलिए उन्होंने अपने बेकरी का नाम कराची बेकरी रखा। इसके बाद से अब तक यह बेकरी अपने बिस्किट और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए काफी प्रसिद्ध हो चुकी है। हालांकि पुलवामा आतंकी हमले के बाद देश में पाकिस्तान विरोधी लहर चल रही है। जिसकी चपेट में यह कराची बेकरी भी आ गई है।

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पुलिस ने कहा है कि कराची बेकरी को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रॉपर्टी के नुकसान की खबर नहीं है। विरोध कर रहे लोगों को लगा कि कराची बेकरी एक पाकिस्तानी दुकान है।

टीएनएम से बात करते हुए मैनेजर ने बताया, भीड़ वहां करीब आधे घंटे तक रुकी। उन्होंने हमसे नाम बदलने की मांग की प्रदर्शनकारियों में से एक आदमी ने आर्मी में लोगों से जान-पहचान की भी बात की। उन्हें लगा हम पाकिस्तान से हैं। लेकिन हम इस नाम का इस्तेमाल पिछले करीब 53 सालों से कर रहे हैं। इसके मालिक हिंदू हैं। केवल नाम कराची बेकरी है। उनके कारण हमने भारतीय झंडा फहराया।

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