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असम के लोगों के लिए एनआरसी में नाम दर्ज कराने को लेकर 28 अक्टूबर तक की समयसीमा निर्धारित की गई है। साथ ही नाम दर्ज करवाने या हटवाने से संबंधित दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने का समय 30 अगस्त से तय किया गया है। यह 28 अक्टूबर तक चलेगा।

इस सबंध में संबंधित पार्टियों को 30 नवंबर तक नोटिस जारी किया जाएगा और 15 दिसंबर से सुनवाई शुरू होगी।  इस दौरान सिर्फ उन लोगों के नाम जोड़ने के दावों को सुना जाएगा जिन्होंने 2015 में इसके लिए अप्लाई किया था, जिस समय आवेदन मांगे गए थे।

हालांकि किसी का नाम गलत दर्ज होने को लेकर कोई भी आपत्ति दर्ज करा सकता है। इसमें कहा गया है, ‘नाम जोड़ने के आवेदन अगर ठुकराए जाते हैं तो इसके लिए कोई सजा का प्रावधान नहीं है।’

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एसओपी में कहा गया है, ‘सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार यूआईडीएआई के साथ मिलकर सभी आवेदकों के बायॉमेट्रिक एनरॉलमेंट पर काम करेगी। एनआरसी तैयार होने के बाद जिनके नाम एनआसी में हैं, को उनका आधार नंबर दे दिया जाएगा और उन्हें देश कानूनी नागरिक माना जाएगा।’

एसओपी ने उन लोगों को नाम शामिल करने की इजाजत दी, जिन्होंने ‘अतिरिक्त विरासत दस्तावेज’ जमा किए, बशर्ते ये कानूनी रूप से मान्य हों और पहले जमा किए गए दस्तावेजों की श्रेणियों से संबंधित हों।

बता दें कि एनआसी में करीब 40 लाख लोगों के नाम नहीं आए है। जिसके चलते एक बड़ी आबादी की नागरिकता पर संशय बना हुआ है। हालांकि सरकार ने फिलहाल इन लोगों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से साफ मना किया है। सरकार का कहना है कि 1971 से पहले के दस्‍तावेज दिखाने पर एनआरसी में नाम आ जाएगा।

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