कथित रूप से ABVP कार्यकर्ताओं की पिटाई के बाद 14 अक्तूबर से जेएनयू से लापता हुए छात्र नजीब के मामलें में दिल्ली की अदालत ने 27 मार्च तक के लिए अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है. नजीब अहमद के लापता होने के मामले में संदिग्ध नौ छात्रों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराए जाने के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट अब 27 मार्च को फैसला सुनाएगा.

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुमित दास को आदेश आज देना था लेकिन उन्होंने यह मामला स्थगित कर दिया और कहा कि आदेश तैयार नहीं है. अदालत ने 15 मार्च को अपना आदेश उस समय सुरक्षित रखा था जब छात्रों की ओर से पेश वकील ने कहा था कि लाई डिटेक्टर परीक्षण जब तक स्वेच्छा से ना हो, असंवैधानिक और अवैध होता है.

छात्रों की तरफ से वकील भूषण आर्या ने अदालत के समक्ष कहा था कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार लाई डिटेक्टर टेस्ट नियमों के विरुद्ध और गैर संवैधानिक है. व्यक्ति जब तक अपनी इच्छा से इसकी इजाजत नहीं देता, कोई उसे इस टेस्ट के लिए मजबूर नहीं कर सकता है.

याद रहें 22 दिसंबर 2016 को हाई कोर्ट ने पुलिस को यह निर्देश दिया था कि वह लापता छात्र नजीब को ढूंढ़ने के लिए कदम उठाए. जरूरत पड़ने पर संदिग्ध छात्रों का लाई डिटेक्टर टेस्ट भी कराया जाए. दिल्ली पुलिस ने 23 जनवरी को जारी नोटिस में दावा किया था कि नजीब के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए आरोपी छात्रों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराना जरूरी है. आरोपी छात्रों ने यह टेस्ट करवाने से इनकार किया और वो इस मामले को अदालत में ले गए.

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