जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद मामले में सोमवार, 26 फरवरी को नई दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय पर जेएनयू छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष शेहला रशीद के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद एक बाद फिर से नजीब को आईएसआईएस से जोड़कर बदनाम करने की साजिश की जा रही है.

सोशल मीडिया पर नजीब के सीरिया जाकर आईएसआईएस ज्वाइन करने की फर्जी खबरे चलाई जा रही है. ध्यान रहे नजीब अहमद 15 अक्टूबर 2016 को कॉलेज हॉस्टल से उस वक्त गायब हो गया था, जब एबीवीपी के सदस्यों ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की थी.

हालांकि यह पहली बार नहीं है कि नजीब के और आईएसआईएस के रिश्तों को लेकर फर्जी खबरे चलाई गई हो. इससे पहले 21 मार्च 2017 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने फ्रंट पेज पर प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया कि नजीब के इंटरनेट ब्राउजिंग हिस्ट्री में कथित रूप से आईएसआईएस के बारे में जानकारी मिली.

जब कुछ पत्रकारों ने इस सबंध में दिल्ली पुलिस से आधिकारिक तौर पर जानकारी मांगी. जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया और फिर मजबूरन टाइम्स ऑफ इंडिया को 75-शब्द की टिप्पणी प्रकाशित करनी पड़ी. जिसमे कहा गया कि दिल्ली पुलिस ने इस तरह की खबर को खारिज किया है.

एक बार फिर से नजीब को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरे फैलाई जा रही है. ये खबर शैफाली वैद्य और गौरव झा जैसे एबीवीपी नेता फैला रहे है. कई अन्य, जानबूझकर या अनजाने में इस रिपोर्ट को शेयर कर रहे हैं. जिनमे कुछ मीडिया संगठन भी शामिल है.

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