नैनीताल | उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद विपक्षी दलों ने ईवीएम् में छेड़छाड़ का मामला उठाया था. विपक्षी दलों का आरोप था की बीजेपी ने ईवीएम् में छेड़छाड़ कर इतनी बड़ी जीत हासिल की है. इस सम्बन्ध में कुछ याचिकाए सुप्रीम कोर्ट में भी डाली गयी है. इसके अलावा 16 विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मिल मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है.

हालाँकि पिछले कुछ दिनों से यह मुद्दा सुर्खियों से बाहर होने की कगार पर था लेकिन कल आये दिल्ली एमसीडी नतीजो ने इस मुद्दे को फिर गरमा दिया है. आम आदमी पार्टी के नेता लगातार ईवीएम् टेंपरिंग का मामला उठा रहे है. लेकिन न ही मोदी सरकार और न ही चुनाव आयोग यह मानाने को तैयार है की ईवीएम् में छेड़छाड़ हो सकती है. इसी बीच ईवीएम छेड़छाड़ मामले में ही नैनीताल हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

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एक याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाई कोर्ट ने विकासनगर विधानसभा सीट के चुनावो में उपयोग में लायी गयी ईवीएम् को सीज करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह फैसला पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात की याचिका पर सुनाया है. दरअसल नवप्रभात ने हाई कोर्ट में याचिका डाल आरोप लगाया था की देहरादून के विकासनगर विधानसभा सीट के लिए हुए चुनावो में बड़े पैमाने पर ईवीएम् के साथ छेड़छाड़ की गयी.

नवप्रभात ने इस मामले में कोर्ट से हस्तक्षेप करने और जांच करने की मांग की थी. उन्होंने कोर्ट को फर्जी वोटरो के द्वारा वोट डाले जाने की भी जानकारी दी. इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया की इस सीट से विधायक चुने गए बीजेपी नेता मुन्ना सिंह चौहान के खुद दो क्षेत्रो से वोट बने हुए है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की एकलपीठ ने विकासनगर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने मशीन को सील कर प्रीजर्व करने के आदेश दिए हैं.