धर्म को आतंकवाद से जोड़े जाने पर उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि आतंकवाद को धर्म से जोड़कर खतरनाक खेल खेला का रहा है.

बुधवार को  इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, एक आतंकवादी मानव नहीं होता है. वह राक्षस होता है. उन्होंने कहा, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, यह साफ-साफ समझ लेना चाहिए. दुर्भाग्यवश, कुछ लोग आतंकवाद को एक धर्म या दूसरे धर्म से जोड़ रहे हैं. यह समाज के लिए समस्या है.

नायडू ने कहा, ‘‘कुछ मित्र आतंकवाद को धर्म के साथ जोड़ना चाहते हैं, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके. कुछ लोग यह खतरनाक खेल खेल रहे हैं. हमें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. कोई भी धर्म आतंक की शिक्षा नहीं देता. इस दौरान उन्होंने कहा, मैं अब को राजनीतिज्ञ नहीं हूं और मैं किसी पार्टी से संबंधित नहीं हूं .

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भाषा को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कई हिंदू तो मुस्लिमों से भी अच्छी उर्दू बोलते हैं. पहले हिंदी सीखने की जरूरत पर जोर देकर विवाद पैदा कर चुके नायडू ने कहा कि किसी भाषा को किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए और पहला ध्यान मातृभाषा सीखने पर होना चाहिए.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जाति, लिंग, समुदाय, भाषा और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे लोग जितनी भाषा सिख सकते हैं उतना सीखें, लेकिन वह पहली प्राथमिकता अपनी मातृ भाषा को दे.

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