नागालैंड के राज्यपाल आरएन रवि और NSCN (I-M) के साथ शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, एनएससीएन-आईएम ने शुक्रवार को नगाओं के अपने अलग झंडे और संविधान की मांग कर डाली।

संगठन के महासचिव टी मुइवाह ने एनएससीएन-आईएम के सदस्यों को संबोधित करते हुए मुइवाह ने कहा, “आप मान्यता दें या न दें, हमारे पास अपना झंडा और संविधान है। झंडा और संविधान हमारी संप्रभुता की निशानी है और नगा राष्ट्रीयता का प्रतीक है। नगाओं को अपना झंडा और संविधान रखना ही चाहिए।”

मुइवाह ने दावा किया कि नगालैंड के राज्यपाल और बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले आर एन रवि ने 31 अक्टूबर 2019 को कहा था, “हम आपके झंडे और संविधान का सम्मान करते हैं। हम यह नहीं कहते कि भारत सरकार उन्हें खारिज करती है, लेकिन हमें इन पर जल्दी फैसला लेना होगा।”

राज्य के सबसे बड़े उग्रवादी संगठन एनएससीएन (आई-एम) और केंद्र सरकार ने ठीक 23 साल पहले वर्ष 1997 में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट यानी समझौते के प्रारूप पर हस्ताक्षर करने के बाद शांति प्रक्रिया के मंजिल तक पहुंचने की कुछ उम्मीद जरूर पैदा हुई थी।

अपने संदेश में मुइवा ने कहा कि 2015 का समझौता परस्पर सहयोग और साझा संप्रभुत्ता का था। सरकार ने समझौते में नगा संप्रभुत्ता को स्वीकार किया था। नगा भारत के साथ साझा रहेंगे और संप्रभुत्ता शक्ति को साझा करेंगे लेकिन वह भारत के साथ विलय नहीं करेंगे। संगठन के पक्ष को दोहराते हुए मुइवाह ने कहा कि झंडे और संविधान के बिना उग्रवाद की समस्या का सम्मानजनक समाधान नहीं निकलेगा।

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