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Source: ANI
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अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन राम मंदिर के लिए देने की वकालत करने वाले मौलाना सलमान नदवी को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बाहर का रास्ता दिखा चूका है. लेकिन नदवी अब भी अपनी जिद पर अड़े हुए है.

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ‘इससे बेहतर होता कि हम देश में शांति और एकता के लिए मिसाल पेश करते हुए बाबरी मस्जिद को शिफ्ट करने की पहल करते. जमीन की लड़ाई की जगह हमें दंगा पीड़ित लोगों के लिए मुआवजे की लड़ाई लड़नी चाहिए.

नदवी ने कहा, ‘पिछले 25 वर्षों से इस मामले में कोर्ट किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है. अगर कोर्ट किसी नतीजे पर पहुंचता भी है तो किसी न किसी पक्ष को दुख होगा. मैं देश में शांति और एकता चाहता हूं. मुझे लगता है कि शांति और एकता के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है कि हम इस मुद्दे को कोर्ट के बाहर ही सुलझा लें.’

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नदवी ने कहा, ‘जब इस्लाम हमें मस्जिद शिफ्ट करने की इजाजत देता है तो फिर दिक्कत क्यों है. क्या हम लंबे समय तक की शांति के लिए, देश में एकता के लिए यह कदम नहीं उठा सकते. मुझे लगता है कि यही एक विकल्प है जिसके जरिए हम एक बेहतर संदेश समाज को दे सकते हैं. कोर्ट के बाहर समझौता करके हम शांति और एकता स्थापित कर सकते हैं.’

नदवी ने कहा कि इस समझौते के बदले हम सुप्रीम कोर्ट से यह सुनिश्चित करवाने की मांग कर सकते हैं कि इसके बाद इस्लाम से जुड़े किसी भी धार्मिक स्थल के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा और बाबरी विध्वंस के पीड़ित लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए. उन्होंने कहा कि उन्होंने शुरू से ही यह प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा है. पर, बोर्ड ने हमेशा उनके प्रस्ताव को नजरअंदाज किया.

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