Thursday, January 20, 2022

मोदी सरकार में यूपीए-2 की तुलना में मुस्लिमों को मिला ज्यादा वजीफा

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अल्पसंख्यकों के मामले में मोदी सरकार हमेशा ही निशाने पर रहती है। लेकिन इस बार मोदी सरकार की तारीफ की जा रही है। ये तारीफ अल्पसंख्यक छात्रों को शिक्षा छात्रवृत्ति देने के मामले में हो रही है।

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 20 लाख से अधिक अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति मिली। 2014 से 2019 के बीच 3.14 करोड़ अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति मिली वहीं मनमोहन सिंह सरकार के दौरान 2009 से 2014 के बीच ये आंकड़े 2.94 करोड़ रुपए थे।

द प्रिंट द्वारा एक्सेस और तुलना किए गए वार्षिक मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2014-2019 के बीच शिक्षा छात्रवृत्ति पर 8,715.4 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि 2009-2014 के बीच 5,360.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अल्पसंख्यक मामलों में मंत्रालय तीन स्तरों पर छात्रवृत्ति देता है – प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय छह अल्पसंख्यक समुदायों – मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन को मान्यता देते हैं। जैनों को 2014 में अल्पसंख्यक का दर्जा मिला था। अल्पसंख्यकों में सबसे बड़ा समूह मुस्लिमों का है।

मोदी सरकार के कार्यकाल में 2.37 करोड़ मुस्लिम छात्रों को छात्रवृत्ति मिली। यूपीए -2 के तहत यह आंकड़ा 2.33 करोड़ था। अल्पसंख्यक समुदायों के सशक्तिकरण के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि मोदी सरकार के तहत छात्रवृत्ति के कार्यान्वयन में सुधार हुआ है, लाभार्थी भी अधिक जागरूक हो गए हैं।

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