शनिवार को ऑल इंडिया तंजीम उलमा-ए-इस्लाम ने 12 सूत्री मुस्लिम एजेंडा जारी किया। ये एजेंडा उर्स ए रजवी के मौके पर जारी किया गया। इस एजेंडे में सरकार से मुस्लिम समुदाय की परेशानियों को हल करने की मांग की गई।

तंजीम के महासचिव मौलाना शाहबुद्दीन ने कहा कि देश में लव जिहाद के नाम पर उत्पीड़न, कथित गोरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा पीटकर की जा रहीं हत्याओं पर तत्काल रोक की मांग की है। उन्होने कहा कि ऐसी घटनाओं से मुसलमान दूसरे शहर में जाने से खौफजदा हैं।

उन्होने कहा कि आजादी के बाद से मुसलमानों के हालात सुधारने को लेकर गंभीरता से प्रयास नहीं हुए हैं। यह एजेंडा राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।

एजेंडे की प्रमुख मांगें

  • मुसलमानों की शैक्षिक, आर्थिक स्थिति पर रंगनाथ मिश्र, लिब्राहन कमीशन और सच्चर आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुसलमानों को अनुसूचित जाति-जनजाति में शामिल करने की मांग की। शिक्षा-नौकरी में दस फीसद आरक्षण मांगा है।
  • उर्दू भाषा को सम्मान नहीं मिला। इसे रोजगार के लायक बनाया जाए।
  • शहरों के नाम बदलने का सिलसिला रोका जाए। इसके नाम पर नफरत न फैलाई जाए। एकता-अखंडता सर्वोपरि है।
  • भारत सरकार को पूर्व की तरह इजरायल के बजाय फिलिस्तीन के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। इजरायल मुसलमानों की मस्जिदे अक्सा कब्जाना चाहता है।
  • मुस्लिम शैक्षिक संस्थानों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने के लिए संविधान की धारा 1981 में संशोधन किया जाए।
  • तलाक, हलाला, मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप कर हुकूमत मुसलमानों को डराना चाहती है। सरकार ऐसा करने से बाज आए। यह मजहबी मामला है।
  • प्रधानमंत्री सबका साथ, सबका विकास का वादा निभाएं। ताकि सभी संप्रदायों के साथ देश की तरक्की हो। रोजगार, गरीबी कम करने में सफलता नजर नहीं आ रही है।
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