मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) स्थित अकोला (Akola) में शनिवार को दिल का दौरा पड़ने के चलते एक शख्स की मौत हो गई।  कोरोना संकट में मौत होने की वजह परिवार ने मृतक का शव लेने से मना कर दिया। ऐसे में मुस्लिमों ने मृतक का अंतिम संस्कार किया।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अकोला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (Akola Municipal corporation) के स्वच्छता विभाग के प्रमुख प्रशांत राजुरकर ने को बताया, ‘नागपुर में रहने वाले इस व्यक्ति के बेटे ने शव को लेने और अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। इसलिए स्थानीय मुस्लिम संगठन अकोला कच्छी मेमन जमात ने जिम्मेदारी संभाली। रविवार को कुछ मुस्लिम लोगों ने श्मशान में चिता को जलाया।’

मुस्लिम संगठन के अध्यक्ष जावेद ज़केरिया ने कहा, ‘अकोला में कोरोना के चलते हुई पहली मौत के बाद हमने उन लोगों के लिए अंतिम संस्कार करने का फैसला किया जिनके परिवार ऐसा करने में असमर्थ हैं। हमारे पास पहले एक के लिए माता-पिता की परमिशन लेनी होती है। तब से हमने 60 अंतिम संस्कार किए हैं, जिनमें से 21 कोविड रोगियों के थे। इनमें से पांच हिंदू थे।’

ज़केरिया ने यह भी कहा कि उनके वॉलंटियर्स ने पीपीई पहना और ज्यादातर मामलों में चिता जलाने के बाद रुक जाते हैं। हालांकि रविवार के अंतिम संस्कार में उन्होंने चिता जलाई। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार शख्स के बेटे से संपर्क नहीं किया जा सका।

अकोला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के स्वच्छता विभाग के प्रमुख राजुरकर ने कहा कि वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए लेकिन इसके लिए 5,000 रुपये प्रदान दिए। उन्होंने कहा ‘रविवार के अंतिम संस्कार ने कुछ लोगों को नाराज कर दिया है। वे परेशान हैं कि मृतक का नाम सार्वजनिक हो गया है और बेटा मीडिया कवरेज के कारण परेशान है।’

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