ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की नदवातुल दारुल उलूम में शनिवार से बैठक शुरू हो गई हैं. इस बैठक में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दावा किया हैं कि कुछ मुस्लिम औरतों को छोड़कर समुदाय की बाकि महिलायें इस मामले में शरिअत के कानून का पालन करती हैं.

बोर्ड का दावा है कि देश की 2.7 करोड़ महिलाओं ने एक फार्म पर हस्ताक्षर कर शरई कानूनों का समर्थन किया हैं. बोर्ड ने कहा कि ऐसे में पर्सनल लॉ में दखल नाकाबिले बर्दाश्त है. बोर्ड ने कहा कि मुस्लिम आवाम शरई कानूनों में कोई दखल नहीं चाहता है.

बोर्ड ने कहा कि देश का संविधान मुसलमानों को पर्सनल लॉ पर अमल करने का अधिकार देता है. देश के नागरिकों को राष्ट्रीय एकता के माहौल में धर्म पर अमल करने की आजादी में दखल न दिया जाए. बोर्ड के प्रवक्ता के मुताबिक बैठक में महासचिव मुहम्मद वली रहमानी ने कहा कि तीन तलाक को लेकर बेवजह बतंगड़ बनाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सरकारों के रुख को देखते हुए बोर्ड ने मुसलमानों के बीच इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराया. जिसमें 4.8 करोड़ लोगों ने शरई कानूनों में दखल न दिये जाने की वकालत की है. इसमें 2.7 करोड़ महिलाओं ने हस्ताक्षर किये हैं. इन महिलाओं ने शादी तलाक और विरासत के मसलों पर शरई फैसलों के साथ रहने की रजामंदी दी है. मुसलमान पुरुष और औरत दोनों शरई कानून में बदलाव नहीं चाहते.

अभियान में हस्ताक्षर के साथ भरवाए गए फार्म लॉ कमीशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस बलबीर सिंह को सौंप दिये गये.

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