तलाक को लेकर देश भर में बहस चल रही हैं इस बीच दरगाह आला हजरत से तलाक के सबंध में फतवा जारी किया गया हैं जिसमे कहा गया कि -“महिला भी अपने शौहर को तलाक दे सकती है. उसे यह इख्तियार है, जिसे शरीयत में तफवीज-ए-तलाक का नाम दिया गया है. इस फतवे ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया हैं.

फतवे में कहा गया कि पति के जुल्म और घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को तलाक (खुला) लेकर अलग होने का पूरा अधिकार है. इसी के साथ यदि अगर किसी मुस्लिम महिला का पति शराबी है, दूसरे ऐब है, बीमार या अक्षम है तो मुस्लिम महिला अपने पति को तलाक दे सकती है. बशर्ते निकाह के वक्त उसने अपने पति से यह अख्तियार हासिल किया हो.

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शरीयत के हवाले से दरगाह आला हजरत दारुल इफ्ता मंजरे इस्लाम के मुफ्ती सलीम नूरी ने हाल ही में एक फतवा जारी कर यह बात साफ कर दिया है और तफवीजे़ तलाक कहे जाने वाले इस हक की शर्तें भी बताई हैं. अब तक यही आम धारणा थी कि तलाक का हक सिर्फ पति को है महिला तलाक नहीं दे सकती.

संस्था से जुड़े दारुल इफ्ता के प्रमुख मुफ्ती कफील अहमद ने फतवे में कहा कि इस्लाम में महिलाओं को सताना अथवा उनके साथ जुल्म करना बहुत बड़ा गुनाह है. अगर कोई महिला इस तरह के जुल्म की शिकार हो रही है तो उसे शौहर से तलाक लेने का पूरा हक है। यह अधिकार उसे इस्लाम ने दे रखा है.

इस्लाम में विवाह को खत्म करने के लिए पति और पत्नी दोनों को अधिकार है. पति को यह अधिकार तलाक और पत्नी को खुला के रूप में दिया गया है.

दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी ने कहा है कि “तफवीज-ए-तलाक” का जिक्र बहारे शरीयत में पेज 25 से 41 तक है। दुर्रे मुख्तार जो कि फिकाह-ए-हनफी की किताब है, उसकी चौथी जिल्द में पेज 565 से 587 तक यह मसला बयान किया गया है.

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