उर्दू में भी राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) परीक्षा कराने की मांग कर रही छात्र संस्था स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) की याचिका पर केंद्र सरकार की और से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मुस्लिम छात्र संगठन केंद्र सरकार पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगा रही हैं.

सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ को बताया, किसी तौसीफ अहमद की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार सांप्रदायिक है और सांप्रदायिक आधार पर सोचती है. इस हलफनामे पर मुझे जवाब दाखिल करना होगा. सॉलिसिटर जनरल ने कहा, जवाब दाखिल करने के लिए मुझे कृपया तीन दिन दें.

याद रहे ये हलफनामा स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) के राष्ट्रीय सचिव तौसीफ अहमद की ओर से दाखिल किया गया हैं. एसआईओ की ओर से पेश हुए वकील रविंद्र गारिया ने वरिष्ठ विधि अधिकारी की दलीलें नकारी और कहा कि उन्होंने किसी पर आरोप नहीं लगाया, बल्कि सिर्फ इतना चाहते हैं कि एनईईटी उर्दू में भी आयोजित की जानी चाहिए.

न्यायालय को बताया गया कि एनईईटी से जुड़े एक मामले में एक अन्य पीठ ने 25 साल की उम्र सीमा खत्म कर दी है और पांच अप्रैल तक सीबीएसई के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए फॉर्म भरने की अनुमति दे दी है. पीठ ने कहा, बेहतर होगा कि एनईईटी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही पीठ ही इस मामले की भी सुनवाई करे. मामले को 10 अप्रैल के लिए उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें.

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