नई दिल्ली | अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच शिया धर्म गुरु मौलाना कलबे सादिक ने सलाह दी है की बाबरी मस्जिद की जमीन राम मंदिर बनने के लिए हिन्दूओ को दे देनी चाहिए. इससे पहले शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देखर कबूल किया था बाबरी मस्जिद का निर्माण एक मंदिर तोड़कर किया गया था. अब मौलाना कल्बे सादिक ने देश में शांति और सोहार्द बनाये रखने के लिए यह अपील की.

रविवार को वर्ल्ड पीस एंड हारमनी कॉन्कलेव में बोलते हुए मौलाना कल्बे सादिक ने कहा की अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला हो उसे मुस्लिमो को शांति और सोहार्द के साथ स्वीकार करना चाहिए. अगर फैसला मुस्लिमो के हक़ में होता है तो मेरी विनम्र प्रार्थना है की बाबरी मस्जिद की जमीन को राम मंदिर निर्माण के लिए हिन्दुओ को दे देनी चाहिए. एक जमीन का टुकड़ा देकर आप देश के करोडो लोगो का दिल जीत सकते है. क्योकि जब तक आप कुछ देंगे नही आपको कुछ मिलेगा भी नही.

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मौलाना कल्बे सादिक के इस बयान से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहमत नही है. उनका कहना है की यह मौलाना की निजी राय है. सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगा वो हमें स्वीकार होगा. मौलाना कल्बे सादिक के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुस्लिम बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगमहली ने कहा की यह उनकी निजी राय है, पहले जो फैसला पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल बॉडी और एग्जीक्यूटिव काउंसिल दोनों जगह से पारित हुआ था उससे मौलाना कल्बे सादिक की भी रजामंदी थी.

बताते चले की मुस्लिम पर्सनल बोर्ड भी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में एक याचिकाकर्ता है. इससे पहले 11 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से एतिहासिक दस्तावेजो को अनुवाद के साथ हाजिर होने का आदेश दिया. कोर्ट ने इसके लिए तीन महीने का समय दिया. मामले की अगली सुनवाई 5 दिसम्बर को होगी. इससे पहले शिया बोर्ड ने कोर्ट में कहा की बाबरी मस्जिद का मालिकाना हक़ सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का पूर्व की कोर्ट का फैसला गलत था क्योकि बाबरी मस्जिद का निर्माण अब्दुल मीर ने कराया था जो एक शिया था. यह मस्जिद वहां पहले से मौजूद मंदिर को तोड़कर बनायी गयी थी.

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