मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को बड़ा झटका देते हुए असम सरकार के सभी नियमों को खारिज कर दिया है.

दरअसल, घुसपेठियों का हवाला देकर राज्य की बीजेपी की सरकार ने करोड़ों लोगों की नागरिकता पर सवालिया निशान लगा दिया था. इनमे ज्यादातर मुस्लिमों की संख्या है. असम सरकार ने नागरिकता के प्रमाणन के लिए जन्म प्रमाणपत्र को भी खारिज कर दिया था.

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हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार के इस फैसले को गलत ठहराते हुए खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि पंचायतों द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र को देश में नागरिकता हासिल करने के लिए वैध दस्तावेज माना जाएगा. इससे पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पंचायत द्वारा जारी सर्टिफिकेट को अवैध करार दिया था.

इसके अलावा असम सरकार ने नागरिकों को दो तरह की नागरिकता दी थी. करीब एक करोड़ नागरिकों को मूलनिवासी नागरिकों का दर्जा दिया था, वहीं अन्य को गैर मूलनिवासी नागरिकों का दर्जा दिया था. असम में गैर मूल निवासी नागरिकों की संख्या 3 करोड़ के करीब है.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मूलनिवासियों और गैर मूल निवासियों के बीच कोई अंतर नहीं होगा. कोर्ट ने कहा कि नागरिकता के लिए सिर्फ एक कैटेगिरी होगी- भारत की नागरिकता. सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार द्वारा जारी किए गए सभी नियमों को खोखला साबित कर दिया है.

असम में अब तक 25 मार्च 1971 से पहले के दस्तावेजों को मान्यता नहीं थी. यानी इससे पहले के दस्तावेज धारकों को असम सरकार भारतीय मानने से इनकार करती थी.

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