नई दिल्ली | पुरे देश में ट्रिपल तलाक को लेकर बहस छिड़ी हुई है. खासकर मीडिया में इस मुद्दे को खूब उछाला जा रहा है. रोजाना मीडिया में इसको लेकर बहस कराई जा रही है जहाँ काफी बड़ी संख्या में ऐसी मुस्लिम महिलाओ को बुलाया जाता है जो इससे प्रभावित है. उधर मोदी सरकार भी ट्रिपल तलाक को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है. उनका मानना है की ट्रिपल तलाक खत्म हो सामान नागरिक संहिता लागु होनी चाहिए.

हालाँकि मीडिया ने ट्रिपल तलाक को लेकर ऐसा माहौल तैयार किया है जैसे मुस्लिम महिलाओं का एक बहुत बड़ा तबका इससे प्रभावित है. मीडिया ट्रायल में यह देखने को भी मिल रहा है. काफी अजीबो गरीब तरीके से महिलाओं को तीन तलाक दिया जा रहा है. कोई व्हाट्सएप तो कोई स्पीड पोस्ट से तीन तलाक लिखकर भेज रहा है. हालाँकि मुस्लिम धर्मगुरूओ का इस पर जुदा ख्याल है.

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उनका कहना है की शरियत के अनुसार तीन तलाक देने का अपना तरीका है. एक बार में तीन तलाक नही दिया जा सकता है. जो ऐसा कर रहा है वो गलत है. इसी मुद्दे को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को बैठक की. इसमें तय किया गया की जो भी शख्स गलत तरीके से तीन तलाक देगा उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. बोर्ड ने इसके लिए कॉड ऑफ़ कंडक्ट भी जारी किया.

इसके अलावा मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने दावा किया की जिस तरह से इस मुद्दे को बढ़ा चढ़कर पेश किया जा रह है, स्थिति उतनी भयावह नही है. केवल 10 फीसदी मुस्लिम महिलाए इससे प्रभावित है. मेल टुडे में छपी खबर के अनुसार पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वाली रहमानी ने बताया की हमने इस मुद्दे पर एक सर्वे कराया है जिसमे 5 करोड़ महिलाओं ने तीन तलाक के पक्ष में अपना वोट दिया है. इससे साबित होता है की यह इतना संगीन मामला नही है.

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