Wednesday, December 8, 2021

कभी तीन तलाक के बचाव में दलील देने वाला मुस्लिम पर्सनल बोर्ड, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हुआ दो फाड़

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नई दिल्ली | मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर रोक लगा दी. जहाँ इस फैसले से ज्यादातर मुस्लिम महिलाओं के चेहरे ख़ुशी से खिल गए वही कई मुस्लिम संगठन कोर्ट के इस फैसले से नाखुश दिखे. सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के समर्थन में दलीले देने वाला आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड, इस फैसले के बाद कुछ बंटा बंटा दिखाई दिया. जहाँ बोर्ड का एक धडा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए दिखा तो वही दुसरे धड़े ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया.

इनमे ऑल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने जहाँ कोर्ट के फैसले का स्वागत किया वही ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा की बोर्ड की मीटिंग के बाद ही आगे के कदम पर विचार किया जाएगा. बताया जा रहा है की इस पुरे मामले में शिया गुट सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ है वही सुन्नी गुट फैसले के विरोध में है.

बताते चले की आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड तीन तलाक के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य पक्षकार था. यही नही पर्सनल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में यह दिखाने की भी कोशिश की, की देश की मुस्लिम महिलाओं को इससे कोई आपत्ति नही है. इसके लिए पर्सनल बोर्ड ने पुरे भारत में सिग्नेचर कैंपेन चलाया और दावा किया की करीब 3 करोड़ मुस्लिम महिलाए तीन तलाक की पक्ष में है. इसके अलावा मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की और से कुछ अजीब दलीले भी कोर्ट में दी गयी.

इनमे सबसे पहली दलील यह थी की चूँकि पुरुषो में महिलाओं के मुकाबले फैसला लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता ज्यादा होती है,  इसलिए कुरान में तीन तलाक का अधिकार पुरुषो को दिया गया. उनका कहना था की चूँकि महिलाए पुरुषो पर निर्भर रहती है इसलिए तीन तलाक का अधिकार महिलाओं के पास नही है. हालाँकि जानकारो का कहना है की कुरान में एक बार में तीन तलाक का प्रावधान ही नही है.

इसके लिए सबसे पहले जायज वजह होनी चाहिए. इसके बाद एक लम्बी प्रक्रिया के बाद तीन तलाक दिया जाता है. जिसमे महीनो लग जाते है. इसलिए आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड का यह कहना की एक बार में तीन तलाक देना शरियत के अनुसार है, गलत है. बताते चले की मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने कोर्ट में दलील दी थी की तीन तलाक धर्म से जुड़ा मामला है और यह कुरान और हदीस में वर्णित है. बोर्ड की यह भी दलील थी की संविधान के पार्ट 3 के अनुसार किसी धर्म के पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप नही किया जा सकता.

एनडीटीवी की 12 मई 2017 की खबर के अनुसार ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने उपरोक्त दलीले दी. पूरी खबर पढने के लिए यहाँ क्लिक करे.

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