नई दिल्ली : अयोध्या में बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन के आसपास की 67 एकड़ गैर-विवादित भूमि उसके वास्तविक मालिकों को लौटाए जाने की केंद्र सरकार की मांग पर मुस्लिम पक्षकारों ने आपत्ति जताई है।

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अयोध्या मामले में पक्षकार हाजी महबूब ने मंगलवार को कहा कि सरकार का यह एक बड़ा ‘खेल’ है और ‘इस तरह के कदम से मुल्क बचेगा नहीं।’ हाजी महबूब ने कहा, ‘कोर्ट में केस है तो इसका फैसला हो जाने दीजिए। सुप्रीम कोर्ट जो फैसला करेगा उसे सभी मानेंगे। सब लोग जानते हैं कि यहां राजनीति की जा रही है। भाजपा की सरकार है। मोदी सरकार यदि दो-चार साल पहले यह कदम उठाती तो इसे ठीक कहा जा सकता था। हम जानते हैं कि यह बहुत बड़ा ‘गेम’ है। अगर ऐसा हुआ तो याद रखिए यह मुल्क जलेगा, बचेगा नहीं।’

babri masjid

बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। इसमें मोदी सरकार ने कहा है कि 67 एकड़ जमीन सरकार ने अधिग्रहण की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि जमीन का विवाद सिर्फ 2.77 एकड़ का है, बल्कि बाकी जमीन पर कोई विवाद नहीं है। इसलिए उस पर यथास्थित बरकरार रखने की जरूरत नहीं है। सरकार चाहती है जमीन का कुछ हिस्सा राम जन्भूमि न्यास को दिया जाए और सुप्रीम कोर्ट से इसकी इजाजत मांगी है।

इस मामले में बाबरी मस्जिद के अन्य पक्षकार इकबाल अंसारी को अयोध्या मसले पर केंद्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल अर्जी पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि विवादित जमीन को छोड़ अन्य जमीन को सरकार किसी को भी दें, इस पर उन्हें कोई एतराज नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के माहौल को देखते हुए सरकार कदम उठाए, जिससे हिन्दू-मुस्लिम दोनों को दुख नहीं हो। उन्होंने कहा कि अब ये मसला हल होना चाहिए।

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