Friday, January 28, 2022

अयोध्या केस में मुस्लिम पक्षकार बोले – ज़मीन पर नहीं छोड़ेंगे अपना दावा

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बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में सामने आये सुलहनामे से खुद अलग करते हुए सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को छोड़कर सभी मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपना बयान दाखिल कर कहा है कि उन्होंने विवादित जमीन से अपना दावा वापस नहीं लिया है।

इन लोगों ने मध्यस्था की जानकारी सार्वजनिक होने पर आपत्ति जताई. मुस्लिम पक्षकारों ने मीडिया को एक साझा बयान जारी करते हुए मध्यस्था कमेटी के सदस्य श्रीराम पांचू की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए है.

मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि पहले राउंड की मध्यस्थता विफल होने के बाद मुस्लिम पक्षकारों ने मध्यस्था में जाना बन्द कर दिया था. दूसरे राउंड कि मध्यस्था में सिर्फ सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारुकी, निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास और हिन्दू महासभा के चक्रपाणि गए थे.

मुस्लिम पक्षकरों का कहना है कि मध्यस्था में दिए गए प्रस्ताव की जानकारी सिर्फ सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारुकी, निर्वाणी अखाड़ा के महंत धर्मदास और हिन्दू महासभा के चक्रपाणि को थी. या फिर मध्यस्था पैनल को. ऐसे में मध्यस्था से जुड़ी जानकारी कैसे सार्वजनिक हुई. ये बात प्रेस में कैसे गई की मुस्लिम पार्टी ज़मीन पर दावा छोड़ने को तैयार हो गई है. ये कोर्ट की अवहेलना है.

सभी मुस्लिम पक्षकारों ने एक बयान जारी कर कहा है कि वे बोर्ड द्वारा प्रस्तावित सुलहनामे का समर्थन नहीं करते हैं. उन्होंने यह भी कहा है कि ‘मध्यस्थता समिति के प्रयास उनका प्रतिनिधित्व नहीं करते.’

उनके बयान में कहा गया है, ‘ऐसी परिस्थिति में किसी मध्यस्थता को स्वीकार करना मुश्किल है, खासकर तब जब मुख्य हिंदू पक्षकार खुले तौर पर कह चुके हैं कि वे किसी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं, और मुस्लिम याचिकाकर्ताओं ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे ऐसा नहीं चाहते.’

अदालत में यह बयान सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील शहीद रिज़वी के अलावा सभी मुस्लिम पक्षकारों के वकील- एजाज़ मकबूल, शकील अहमद सईद, एमआर शमशाद, इरशाद अहमद और फ़ुजैल अहमद द्वारा दाखिल किया गया है.

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