Tuesday, August 3, 2021

 

 

 

कॉमन सिविल कोड पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, मुस्लिम संगठनों ने लिया बड़ा फैसला

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नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद देशभर में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक आचार संहिता पर बहस फिर से छिड़ गई है। यूनिफॉर्म सिविल कोड पहले से ही मोदी सरकार के अजेंडे में है।

कोर्ट की टिप्पणी के एक दिन बाद अब कई मुस्लिम संगठनों के सदस्यों ने कॉमन सिविल कोड पर अपनी टिप्पणी दी है। उनका कहना है कि इतनी विविधताओं वाले देश में यह न तो व्यावहारिक है और न ही लागू करना संभव है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे मुस्लिम संगठनों के सदस्यों ने पिछले साल 31 अगस्त को फैमिली लॉज पर विधि आयोग के परामर्श पत्र का भी जिक्र किया।

Courtesy: Lokbharat

AIMPLB के महासचिव मौलाना सैयद वली रहमानी ने कहा, ‘यहां तक कि विधि आयोग भी अपने परामर्श पत्र में स्वीकार करता है कि UCC इस समय न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। मेरा यह विचार है कि भारत में UCC लागू करना अव्यावहारिक है।’

वहीं AIMPLB के सदस्य कमाल फारूकी ने कहा, ‘पर्सनल लॉज में काफी विविधताएं हैं। कैसे एक यूनिफॉर्म सिविल कोड सब पर लागू किया जा सकता है। अगर सरकार इस समय संसद में अपने बहुमत का इस्तेमाल करते हुए UCC लाती भी है तो इससे समस्याओं का पिटारा खुल जाएगा और इसे जमीन पर लागू करना संभव नहीं होगा।’ जमीयत उलेमा-ए-हिंद

बता दें कि  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत पूरे देश में UCC लागू करने पर गंभीर न होने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि 1956 में हिंदू लॉ आने के 63 साल बीत जाने के बाद भी कॉमन सिविल कोड की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए।

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