Thursday, October 28, 2021

 

 

 

#CAA के डर से मुस्लिम बुजुर्ग की गई जान, दम निकलते वक्त बोलते रहे – मुझे मेरे मुल्क से भगा देंगे

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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय काफी डरा हुआ है। जिसको लेकर अब उसकी जान पर भी आफत बन आई है। पश्चिम बंगाल में पूर्वी बर्धमान के असग्राम में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग ने #CAA के  खौफ के चलते दम तोड़ दिया।

70 वर्षीय गियासुद्दीन मियां के भतीजे राजू मियां ने बताया कि हॉस्पिटल ले जाने के रास्ते में मैं उनका बुदबुदाना सुन सकता था। वो कह रहे थे कि उन्हें मुल्क से भगा दिया जाएगा। गियासुद्दीन पिछले बुधवार को संसद के दोनों सदनों में संशोधित कानून पारित होने के बाद घबराए हुए थे और जमीन संबंधी कागजात हासिल करने के लिए खासे बेचैन थे।

टेलीग्राफ के मुताबिक राजू मियां कहते हैं, ‘मेरे चाचा बहुत देर तक टीवी के सामने बैठे रहते थे। वो संशोधित नागरिकता कानून के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी पाने के लिए न्यूज चैनल देखते रहते थे। अपने आधार कार्ड में नाम गलत लिखे जाने से वो खासे परेशान थे। इसमें उनकी जन्मतिथि भी गलत लिखी थी।’ परिवार के अन्य लोगों ने भी बताया कि गियासुद्दीन आधार कार्ड में त्रुटियों को सुधारने की कोशिश में जुटे थे।

राजू कहते हैं, ‘परेशान चाचा को आखिरकार शनिवार को दिल का दौरा पड़ गया। शुक्रवार देर रात को उन्होंने सीने में तेज दर्ज की शिकायत की थी। इसपर उन्हें स्थानीय हॉस्पिटल में ले जाया गया। हॉस्पिटल पहुंचने के तीन घंटे बाद उनकी मौत हो गई।’ सूत्रों ने बताया कि गियासुद्दीन करीब चालीस साल पहले कोटालपुकुर (अब झारखंड में) से आजिविका के लिए असग्राम पहुंचे थे। नागरिकता कानून पास होने के बाद पुराने कागजात निकलवाने के लिए वो कोटालपुकुर पहुंचे थे।

गियासुद्दीन की बेटी रुपाली बेगम कहती हैं, ‘उन्होंने झारखंड में अपने कई रिश्तेदारों को बुलाकर उनसे उन दस्तावेजों का पता लगाने के लिए कहा था। सीएए कुछ भी नहीं है मगर इसके आतंक ने मेरे पिता की जान ले ली।’ मृतक के पड़ोसी कहते हैं कि गियासुद्दीन अपने परिवार के साथ पड़ोसियों के लिए भी खासे चिंचित थे। वो सही कागजात होने के बारे में सभी को सावधान करने में जुटे थे। मामले में टीएमसी लीडर और गांव की निवासी काजल शेख कहती हैं, ‘मैंने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की कि हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी साफ कह चुकी है कि बंगाल सुरक्षित रहेगा। मगर वो गमगीन थे।’

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